अचलगंज। मजदूरी करके परिवार का भरण-पोषण करने वाले शुभम ने 16,337 रुपये का पहला बिल चुकाने के लिए गांव के कुछ लोगों से कर्ज लिया था। कर्ज का बोझ उतारने के लिए वह लगातार मजदूरी कर रहा था। लेकिन 22वें दिन ही फिर आठ हजार का बिल मिला तो वह टूट गया और दोबारा कर्जा लेने की हिम्मत नहीं जुटा सका। आहत होकर शुभम ने अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। परिजनों ने गुरुवार सुबह कोलुहागाड़ा के गंगाघाट पर उसका अंतिम संस्कार कर दिया।
कुशलपुर निवासी शुभम ने बुधवार सुबह घर के बगल में बनी भूसे की कोठरी में फांसी लगा कर जान दे दी थी। पिता महादेव ने आरोप लगाया था कि एक माह के अंदर दो बार बढ़ा हुआ बिजली बिल आने से शुभम सदमे में आ गया और उसने आत्महत्या कर ली। बताया था कि एक सितंबर को पहला बिल एक लाख से अधिक का आया था। विभागीय कार्यालय की काफी भागदौड़ करने व कर्मचारियों को रिश्वत देने के बाद 16 हजार का संशोधित बिल मिला था। जिसे बेटे ने किसी तरह से दूसरों से कर्जा लेकर 14 सितंबर को जमा कर दिया था। यह कर्जा वह उतार नहीं सका था कि 22वें दिन सात अक्तूबर को फिर से आठ हजार से अधिक का बिल आ गया। जिसे लेकर बेटा काफी परेशान हो गया था।
शुभम के साले दीपक ने बताया कि मौत से दो दिन पहले जीजा ने फोन करके रुपये मांगे थे। इस पर उसने (साले दीपक ने) पहले बिल सही कराने के लिए कहा था। उधर, पत्नी रेखा के पास भी जेवर नहीं थे, जिसे बेच कर बिजली का बिल भरता। इन्हीं उलझनों से परेशान होकर शुभम अवसाद में चला गया और कोई रास्ता नजर न आने पर मौत को गले लगा लिया।
बुधवार शाम को शव पोस्टमार्टम के बाद घर पहुंचा था तो परिजनों में चीख पुकार मच गई। पिता महादेव, मां, पत्नी रेखा व भाई मुकेश रोकर बेहाल हो गए। ढाई व डेढ़ साल के बच्चे पिता की मौत से बेखबर गुमसुम परिजनों की गोद में सिमटे रहे। गांव का हर व्यक्ति बिजली विभाग के जिम्मेदारों को कोस रहा था। ग्रामीणों ने कहा कि जिम्मेदारों ने एक हंसते खेलते परिवार को उजाड़ दिया। पहले से ही भूमिहीन परिवार का अब भरणपोषण कैसे होगा, यह सवाल सभी को परेशान कर रहा है।