62 हजार रुपये जुर्माना, पॉक्सो कोर्ट के न्यायाधीश ने सुनाई सजा
संवाद न्यूज एजेंसी
उन्नाव। नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में पॉक्सो कोर्ट के न्यायाधीश ने दोषी पाए गए युवक को सात साल कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 62 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है।
असोहा थानाक्षेत्र के एक गांव निवासी किशोरी के पिता बच्चूलाल ने 21 जुलाई 2015 को पड़ोस के गांव निवासी युवक पर नाबालिग बेटी से दुष्कर्म का आरोप लगा था। पुलिस को बताया था कि उसकी 14 वर्षीय बेटी शाम करीब तीन बजे शौच के लिए खेत गई थी। इसके बाद वह नहीं लौटी।
पिता ने जोरावरगंज निवासी कल्लू पर धमकी देने का आरोप लगाया था। पुलिस ने कल्लू के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की और कुछ दिनों बाद कल्लू और किशोरी को खोज लिया था। किशोरी ने मजिस्ट्रेट को दिए गए बयान में कल्लू पर दुष्कर्म का आरोप लगाया था।
विवेचक अवनीस यादव ने आरोपी के खिलाफ 17 अक्तूबर 2015 को न्यायालाय में आरोप पत्र प्रेषित किया था। सोमवार को मुकदमें में सुनवाई पूरी हुई। अभियोजन पक्ष से प्रदीप कुमार श्रीवास्तव और चंद्रिका प्रसाद बाजपेयी की दलीलों और साक्ष्यों के आधार पर न्यायाधीश पाक्सो कोर्ट विवेकानंद विश्वकर्मा ने दोष साबित होने पर सात साल के कारावास और 62 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
एनडीपीएस एक्ट में चार साल की कैद
उन्नाव। एनडीपीएस एक्ट में चार साल पहले गिरफ्तार किए गए आरोपी को न्यायालय ने चार साल कैद की सजा सुनाई है। साथ ही 20 हजार रुपये अर्थदंड लगाया है।
बारासगवर थानाक्षेत्र के सुखियाखेड़ा गांव निवासी दुर्गाशंकर पुत्र सरदार को पुलिस ने साल 2020 में 230 ग्राम चरस के साथ गिरफ्तार किया था। पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए उसे जेल भेजा था। विवेचक थान सिंह ने आरोपी को दोषी मानते हुए चार सितंबर 2020 को न्यायालय में आरोप पत्र प्रेषित किया। सोमवार को अंतिम सुनवाई में अभियोजन पक्ष से विनय प्रकाश शुक्ला और मनीष शुक्ला की कठिन पैरवी और दलीलों को सुन न्यायालय नंबर चार के न्यायाधीश अनिल कुमार सेठ ने आरोपी को दोषी मानते हुए चार साल कैद और 20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। (संवाद)