चाहे जितने रेल हादसे हों और इनमें कितने भी यात्रियों की जान जाएं या रेल विभाग का नुकसान हो स्थानीय रेल अधिकारियों को इसकी कोई परवाह नहीं है। ऐसा ही कुछ शनिवार को हुआ जब रेल अफसर आराम से सोते रहे और पूरी रात ट्रेनें टूटी पटरी से गुजरती रहीं। शनिवार सुबह करीब पौने आठ बजे आसपास के गांव के लोगों ने देखा कि सोनिक से अरमनगढ़ के बीच खंभा नंबर-4 से 6 के पास डाउन ट्रैक की टूटी पटरी से बेधड़क ट्रेनें गुजर रही हैं। लोगों ने इसकी जानकारी केबिनमैन राजेंद्र सिंह को दी। राजेंद्र ने तत्काल इसकी सूचना रेल अफसरों को पहुंचाई। पटरी टूटने की सूचना मिलने पर स्थानीय अफसरों के पैरों तले जमीन खिसक गई। आनन-फानन में इस रूट की सभी ट्रेनों को पीछे के स्टेशनों पर ही रोक दिया गया। अफसर व कर्मचारी मौके पर पहुंचे और ट्रैक पर मरम्मत कार्य शुरू किया गया। करीब ढाई घंटे की मशक्कत के बाद पटरी को दुरुस्त किया गया और आवागमन सुचारु किया जा सका। इस दौरान उन्नाव स्टेशन पर फरक्का एक्सप्रेस व गंगाघाट में पुष्पक एक्सप्रेस को रोके रखा गया। वहीं अन्य कई ट्रेनों को भी कानपुर सेंट्रल, मगरवारा व सोनिक स्टेशनों पर रोक दिया गया। सीनियर सेक्शन इंजीनियर मो. इरशाद ने बताया कि वह हास्पिटल में हैं। रेल फ्रैक्चर की सूचना तो मिली थी, लेकिन पूरे मामले की जानकारी नहीं है।