संवाद न्यूज एजेंसी
उन्नाव। गर्भवती को अस्पताल पहुंचाने के लिए समय से एंबुलेंस नहीं मिली। इसके बाद पति उसे ई-रिक्शा से लेकर जिला महिला अस्पताल पहुंचा। अस्पताल में स्ट्रेचर नहीं मिलने पर पत्नी को गोद में उठाकर अस्पताल में भर्ती कराया। प्रसव के बाद नवजात की हालत गंभीर होने पर उसे हैलट रेफर कर दिया गया।
सदर तहसील क्षेत्र के आटा गांव निवासी महेश की पत्नी अंजू (29) को बुधवार 12 बजे प्रसव पीड़ा हुई। पति महेश के अनुसार, उसने 102 एंबुलेंस को फोन मिलाया। एंबुलेंस चालक से फोन पर बात हुई तो उसने अचलगंज सीएचसी ले जाने की बात कही। महेश ने जिला अस्पताल नजदीक होने की बात कही तो चालक ने ले जाने से मना कर दिया।
पति ई-रिक्शा से पत्नी को लेकर जिला महिला अस्पताल पहुंचा। यहां अस्पताल के मुख्य द्वार पर गर्भवती को तेज प्रसव पीड़ा होने लगी। पति ने स्टाफ से स्ट्रेचर मांगा तो उसे स्ट्रेचर नहीं मिला। महेश पत्नी को गोद में उठाकर वार्ड तक ले गया और उसे भर्ती कराया।
पति के अनुसार, गेट पर ही आधा प्रसव (आधा बच्चा बाहर आ गया था) हो गया था। यदि गोद में उठाकर न ले जाता तो वहीं प्रसव हो जाता। प्रसव के बाद बच्चे की हालत गंभीर देख डॉक्टरों ने उसे एसएनसीयू वार्ड में भर्ती कराया और रीड़ की हड्डी में फोड़ा बताया। हालत में सुधार न होने पर उसे कानपुर हैलट रेफर कर दिया गया। महेश ने बताया कि यह उसका तीसरा बच्चा है। पहले दो बच्चों की मौत हो चुकी है।
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एंबुलेंस पहले नजदीकी अस्पताल ही लेकर जाती है। जिला अस्पताल यदि नजदीक था और चालक ने पहले अचलगंज सीएचसी ले जाने की बात कही तो इसकी जांच कराई जाएगी। इसके बाद उस पर कार्रवाई की जाएगी। - विराट श्रीवास्तव, एंबुलेंस जिला प्रभारी
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प्रसूता घर से देर में निकली थी। महिला अस्पताल में स्ट्रेचर पर्याप्त हैं। आशा कार्यकर्ता स्ट्रेचर लेने अंदर गई थी। इतने में ही पति गोद में पत्नी को लेकर अंदर पहुंच गया। जहां उसे भर्ती करके प्रसव कराया गया। - डॉ. संजू अग्रवाल, महिला सीएमएस