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Unnao News: फर्नीचर खरीद में लाखों का गड़बड़ी

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उन्नाव। उन्नाव खंड शारदा नहर कार्यालय में अंधेरगर्दी के रोजाना नए मामले सामने आ रहे हैं। अब फर्नीचर खरीद में बाजार मूल्य से चार गुना अधिक मूल्य से खरीदारी की बात सामने आई है। हालांकि एक्सईएन का दावा है कि जेम पोर्टल से खरीदारी की गई है।
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मालूम होकि सिविल लाइन निवासी अजय वीर सिंह चंदेल ने उन्नाव खंड शारदा नहर कार्यालय में हर कदम पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए लोकायुक्त से शिकायत की है। उन्होंने आठ बिंदुओं का शिकायतीपत्र देकर लोकायुक्त से जांच कराने की मांग की है। इसमें पुल पुलियों के निर्माण, मरम्मत में फर्मेां का फर्जी अनुभव पत्र लगाकर बिना सत्यापन कराए निविदाओं को कराकर अनुबंधों का गठन, सिटी जेल ड्रेन में अधोमानक कार्य कराने सहित अन्य कार्यों में गड़बड़ी करके करोड़ों की गड़बड़ी का आरोप लगाया गया है।
अब विभाग में मार्च में खरीदे गए फर्नीचर में गड़बड़झाले का मामला प्रकाश में आया है। अजय वीर सिंह चंदेल के मुताबिक, 31 मार्च को फर्नीचर खरीद का बिल भी निकाला और उसी दिन भुगतान भी कर दिया गया। सामान्य कुर्सी जो 15 सौ से दो हजार के बीच कीमत है। उनका भुगतान 10508 रुपये में किया गया। कुल 40 कुर्सियां खरीदी गईं। इसी प्रकार घूमने वाली कुर्सी जो बाजार में मात्र 45 सौ से पांच हजार में उपलब्ध है उसका भुगतान 17554 रुपये का किया गया। यह छह कुर्सियां खरीदी गईं।
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चार सात सीटर सोफा का 2.55 लाख का भुगतान किया गया। इसके अलावा चार एसी, जनरेटर सहित अन्य सामान खरीदने के नाम पर भुगतान किया गया लेकिन सामान नहीं आया। बताया कि जेम पोर्टल से खरीदारी तो की गई लेकिन फर्म मात्र एक ही रही। विभागीय मिलीभगत से इसमें भी खेल किया गया। जिन अन्य फर्मेां ने आवेदन भी किया उन्हें बाद में रेट ज्यादा कराकर हटवा दिया गया। जिससे उनकी मनमाफिक फर्म को ही इसका काम मिल गया।
नियमानुसार खरीद प्रक्रिया में कईयाें के हस्ताक्षर होने चाहिए। सबसे पहले एसडीसी, फिर एई, आडिटर, लेखाकार और आखिर में एक्सईएन के साइन होने चाहिए लेकिन एसडीसी, आडिटर व लेखाकार ने इसमें साइन ही नहीं किए। अजय वीर सिंह चंदेल का कहना है कि इतना बड़ा घपला होने के बाद भी जिलास्तर पर किसी भी अधिकारी ने कार्यालय जाकर जांच करने की जहमत नहीं उठाई है। बताया कि वह मामले में शांत नहीं बैठेंगे। यदि जल्द जांच नहीं शुरू की गई तो वह अनशन करेंगे।
एक्सईएन शैलेश कुमार सिंह का कहना है कि फर्नीचर खरीद जेम पोर्टल के माध्यम से की गई है। फर्नीचर अप्रैल से आना शुरू हो गया था। वैसे भी मामले की जांच के लिए अधीक्षण अभियंता ने टीम गठित कर दी है। जांच में सब सामने आ जाएगा।
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