मालूम हो कि विकासखंड नवाबगंज के ग्राम परौरा में गलाघोंटू बीमारी से ग्रषित होकर लगभग एक दर्जन पशुओं ने दम तोड़ दिया था। वहीं दो दर्जन से अधिक मवेशी बीमार चल रहे हैं। ग्रामीणों ने इसकी सूचना कई बार पशुपालन विभाग के अधिकारियों को दी लेकिन किसी ने भी इस पर ध्यान नहीं दिया। अमर उजाला ने 23 जनवरी के अंक में इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया। खबर छपने के बाद अधिकारी हरकत में आए और विभाग की टीम परौरा गांव पहुंच गई। टीम के सदस्यों ने पशुओं को गलाघोंटू बीमारी से बचाव के लिए बहुउद्देशीय टीकाकरण अभियान शुरु किया। इसमें 55 पशुओं की जांच की और 168 मवेशियों को टीका लगाया। वहीं पशुओं को होने वाले बीमा की जानकारी भी पशुपालकों को दी गई। सोहरामऊ में तैनात पशु चिकित्सक डा. धनेश गुप्ता ने बताया कि गलाघोंटू एक जीवाणु जनित संक्रामक बीमारी है। जोकि एक पशु से दूसरे पशु में हवा, पानी के संपर्क में आने से फैलती है। पशुओं में यह बीमारी आने पर यह एक आउटब्रेक का रुप ले लेती है। जिससे इसमें कई बार पशुओं की मौत भी हो सकती है। अधिकतर पशु इससे ग्रसित होते हैं। समुचित टीका के अभाव में अपनी जान गवां देते हैं। इससे बचाव के लिए इस प्रकार का अभियान चलाया गया ताकि मवेशी इस भयानक रोग से छुटकारा पा सके। टीम ने पशुपालकों के घर पर जाकर बचाव टीकाकरण का कार्य किया गया। वहीं पशुपालकों को पशुधन बीमा योजना की भी जानकारी दी गई। टीम में पशु धन प्रसार अधिकारी संजीव मिश्र, उमाशंकर, वशिष्ठ नारायण तिवारी शामिल रहे।