ईद त्योहार को लेकर अकरमपुर बाजार में सुबह से ही काफी चहल-पहल थी। मृतका गुलिफ्शां के दो बड़े भाई सलमान और आरिफ पिता के साथ मुंबई में काम करते हैं। मां व बहनों के साथ त्योहार मनाने के लिए दोनों मंगलवार को ही घर आ गए थे। आरिफ और छोटी बहन बुसरा नए कपड़े लाने के लिए मां से जिद कर रहे थे। जिस पर बुधवार सुबह मां चमन बड़ी बेटी गुलिफ्शां को लेकर बाजार के लिए निकली। उसे क्या पता था कि त्योहार मनाने से पहले उसे इस वारदात से होकर गुजरना पड़ेगा। गुलिफ्शां से शादी करने के लिए आरोपी इस्लाम पहले भी उसके घर आकर दबाव बना चुका था।
भविष्य की सोच करती रही इंकार
मृतका की मां ने बताया कि वह गलत संगत में पड़ चुका था। वह कहीं कमाने भी नहीं जाता था। बेटी का भविष्य बर्बाद न हो इसके लिए वह इस्लाम से शादी को इंकार करती रही। कई बार उसने इस्लाम से कमाने के साथ गलत संगत छोड़ने के लिए भी कह चुकी थी। मां की बात मान युवती भी शादी से इंकार करती रही। बुधवार को इस्लाम पूरी तैयारी के साथ युवती से मिलने आया था। जैसे ही युवती बाजार जाने के लिए मां के साथ निकली। सरेबाजार उसने युवती पर शादी का दबाव बनाया। उसके इंकार करने पर गोली मार दी। हालांकि हत्या वारदात को अंजाम देने के बाद भाग न सका और भीड़ के हत्थे चढ़ गया। सही समय पर पुलिस मौके पर न पहुंचती तो भीड़ उसे पीट-पीटकर मार डालती।
बयान देने से बार-बार बचता रहा आरोपी
घटना की सूचना मिलते ही एएसपी व सीओ फोर्स के साथ पहले घटनास्थल फिर जिला अस्पताल पहुंचे। पुलिस ने आरोपी से उसका पक्ष जानने की कोशिश की पर आरोपी अपने बचाव में एक शब्द भी नहीं बोला। हर बार उसने कुछ याद न होने की बात पुलिस से कही। एएसपी ने आरोपी की हालत सामान्य होने के बाद उससे पूछताछ करने की बात कही है। एसपी व कोतवाली प्रभारी संजय पांडेय ने आरोपी का पक्ष जानना चाहा तो उसने कुछ भी याद न होने की बात कही। पुलिस उसकी हालत सामान्य होने का इंतजार कर रही है।
त्योहार की खुशियों पर लगा ग्रहण
परिवार के साथ ईद की खुशियां मनाने मुंबई से आए भाई सलमान और आरिफ का रो-रोकर बुरा हाल था। वह बहन के शव को देख बदहवाश हो गए। मां चमन छाती पीट-पीटकर रो पड़ी। मुंबई में मृतका के पिता को फोन से घटना की जानकारी दी गई है। उसने जल्द ही घर पहुंचने की बात कही है।
लोगों में दिखा पुलिस का खौफ
घटनास्थल पर पहुंचे एएसपी हरदयाल व सीओ रामअर्ज ने घटना के बाबत लोगों से जानकारी लेनी चाही तो पुलिस के डर से कोई बोलने को तैयार नहीं हुआ। मोहल्ले की कुछ महिलाओं और बच्चों ने साहस जुटाते हुए पुलिस को घटना की जानकारी दी। बाजार में दुकान खोले लोग घटना के बाद दुकानें बंद कर घर निकल गए। हर कोई पुलिस के चक्कर में पड़ने से खुद को बचाता रहा।