फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

संदिग्ध हालात में ट्रक हेल्पर की मौत

Sat, 18 Jun 2016 12:54 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, उन्नाव
विज्ञापन
मृतक के परिजन - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
दिल्ली के एक ट्रांसपोर्ट से ट्रांसफार्मर लेकर दही चौकी सबस्टेशन आए ट्रक के हेल्पर की संदिग्ध हालात में मौत हो गई। मृतक के ममरे भाई ने शुक्रवार की सुबह हेल्पर के पेट में दर्द होने पर उसे डाक्टर को दिखाने की बात कही। लगभग चार घंटे चले इलाज के दौरान उसकी हालत बिगड़ गई। गंभीर हालत में डाक्टर ने उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया। यहां इलाज के कुछ देर बाद उसने दम तोड़ दिया। ममरे भाई ने निजी डाक्टर पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर पुलिस मामले की जांच कर रही है।
विज्ञापन

इलाहाबाद के सरांव गांव निवासी सत्येंद्र पटेल (20) पुत्र राजेश्वर प्रसाद ट्रक चालक कमल सोनी के साथ दिल्ली के कैरावान रोडवेज लिमिटेड ट्रांसपोर्ट से ट्रांसफार्मर लादकर सदर कोतवाली के दही चौकी सबस्टेशन आया था। सत्येंद्र ट्रक में हेल्पर था। शुक्रवार की दोपहर दो बजे करीब गंभीर हालत में सत्येंद्र को ममेरा भाई राजेंद्र पटेल जिला अस्पताल लेकर पहुंचा। जिला अस्पताल में राजेंद्र ने सत्येंद्र के पेट में दर्द उठने पर उसका दही चौकी स्थित एक प्राइवेट क्लीनिक में इलाज कराने की बात बताया। राजेंद्र के मुताबिक डाक्टर ने सत्येंद्र को करीब चार घंटे तक क्लीनिक में रखा। इस दौरान उसने लगभग दो हजार का बिल बना दिया। आरोप लगाया कि रुपये लेने के बाद डाक्टर ने सत्येंद्र की हालत नाजुक बता उसे जिला अस्पताल ले जाने की बात कही। जिला अस्पताल में सत्येंद्र को सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। जिस पर डाक्टर ने उसे आक्सीजन देना शुरू किया। कुछ देर बाद अस्पताल बेड पर उसने दम तोड़ दिया। मौत की वजह संदिग्ध देखकर डाक्टरों ने पोस्टमार्टम के लिए शव को मर्च्युरी में रखवा दिया। सदर कोतवाली प्रभारी ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। इधर मृतक के ममरे भाई ने प्राइवेट क्लीनिक के डाक्टर पर गलत इलाज का आरोप लगाया है।

इंसेट
मौत के बाद भी दी जाती रही आक्सीजन
जिला अस्पताल में इलाज के दौरान ट्रक के हेल्पर सत्येंद्र की मौत हो गई। स्टाफ नर्स की सूचना पर इमरजेंसी के डाक्टर उसे मृत बता लौट गए। हेल्पर की मौत होने के बाद भी उसे ड्रिप चढ़ाई जाती रही। लगभग आधा घंटा तक आक्सीजन मास्क लगा रहा। कर्मचारी कागजी खानापूरी करने में लगा रहा। वार्ड में भर्ती मरीजों के तीमारदारों ने जब इसकी जानकारी नर्साें को दी तब आक्सीजन मास्क हटाया गया और ड्रिप हटा कर शव मर्च्युरी भेजा गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें