झोलाछाप के इलाज से बच्चे की जानजोखिम में पड़ गई है। तीन माह से बुखार आने और लगातार दस्त होने से बच्चे का शरीर सूख गया। सोमवार को जिला अस्पताल पहुंचे बच्चे की हालत देख डाक्टर भी हैरत में पड़ गए। डाक्टरों ने बच्चे के परिजनों को फटकार लगा इलाज शुरू किया। डाक्टरों ने बताया कि पानी और खाने की कमी से ऐसी हालत हुई है। उसे अच्छे इलाज की जरूरत थी। झोलाछाप ने बच्चे के जीवन से खिलवाड़ किया है।
गंगाघाट थाना क्षेत्र के लक्मीखेड़ा शंकरपुर सरांय गांव निवासी धर्मेंद्र दो बच्चों का पिता है। छोटा बेटे निखिल (2) को तीन माह पहले बुखार आना शुरू हुआ। कुछ दिन बाद उसे दस्त पड़ने लगे। धर्मेंद्र मजदूरी कर परिवार का गुजारा चलाता है। सुबह काम पर जाने की जल्दी में वह बच्चे को जिला अस्पताल न लाकर गांव के ही झोलाछाप से इलाज कराता रहा। बच्चे की हालत दिन-प्रतिदिन बिगड़ती चली गई। पानी और भोजन की कमी से शरीर सूख गया। सोमवार सुबह अचानक उसकी आंखें पलट गई। बच्चे की हालत बिगड़ते देख झोलाछाप ने जिला अस्पताल ले जाने की बात कही। बच्चे की मां अनीता और दादी रामरती उसे लेकर दोपहर को जिला अस्पताल पहुंची। इमरजेंसी के डाक्टर ने बच्चे की हालत देख मां व उसकी दादी को जमकर फटकार लगाई। दादी व मां ने बताया कि गांव के झोलाछाप बच्चे को ठीक करने की बात कह इलाज करता रहा। बच्चे की बिगड़ती हालत देख डॉक्टर ने उसे तुरंत भर्ती कर इलाज शुरू किया। वार्ड में भर्ती मरीज और तीमारदारी कर रहे लोग भी बच्चे की हालत देख उसकी मां व दादी को फटकारते नजर आए।