उन्नाव। चार साल पूर्व बांगरमऊ कसबे से मासूम को अगवा कर 20 लाख रुपये की फिरौती मांगने वाली मां-बेटी व एक युवक को अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दोषियों पर न्यायालय ने 10- 10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। बांगरमऊ के मोहल्ला गढ़ी निवासी माया प्रकाश वर्मा के बेटे कुशाग्र का 18 अक्टूबर 2013 कोघर से बाहर खेलते समय अपहरण हो गया था। माया प्रकाश ने 18 अक्टूबर की दोपहर बांगरमऊ थाने में बेटे की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। माया प्रकाश के मोबाइल पर अपहरणकर्ताओं ने फोन कर 20 लाख रुपये की फिरौती मांगी थी। पुलिस ने फिरौती मांगने वाले नंबर को सर्विलांस पर लगाया।
सर्विलांस के आधार पर तत्कालीन कोतवाली प्रभारी जितेंद्र प्रताप सिंह व क्राइम ब्रांच प्रभारी अंजुल चतुर्वेदी ने बांगरमऊ कसबे के सेमगंज बाजार में रहने वाले सुनील को उठाया था। पूछताछ में सुनील ने अपहरण की कहानी से पर्दा उठाया। सुनील ने पुलिस को बताया था कि स्टेशन रोड निवासी शिवा पुत्र हीरालाल, ब्रम्हा देवी पत्नी मिश्रीलाल और ब्रम्हादेवी की पुत्री मंजू ने फिरौती के लिए बच्चे का अपहरण किया था। मंजू फतेहपुर चौरासी थाना क्षेत्र के राजेपुर निवासी संजू की पत्नी है। सुनील की निशानदेही पर पुलिस ने गढ़ी मोहल्ले में मिश्रीलाल के मकान में ड्रम में बंद करके रखे गए मासूम कुशाग्र को बेहोशी की हालत में पाया। वह शोर न मचा सके इसके लिए उसके मुंह में टेप चिपका दिया था। पुलिस ने शिवा, ब्रम्हादेवी और मंजू को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। मुकदमे की सुनवाई करते हुए फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश मुहम्मद राशिद ने अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलों और गवाहों को सुनने के बाद तीनों पर दोष साबित होने पर मंगलवार को तीनों को उम्रकैद का फैसला सुनाया। साथ ही सभी पर दस दस हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अभियोजन पक्ष से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता रामजीवन यादव ने पैरवी की।