उन्नाव। विकासखंड फतेहपुर चौरासी की ग्राम पंचायत हयासपुर में मनरेगा धन के दुरुपयोग की शिकायत की एक बार फिर जांच के आदेश दिए गए हैं।
पिछले माह डीएम ने प्रधान के वित्तीय अधिकार बहाल किए जाने के बाद शिकायतकर्ता ने सीबीआई को पत्र भेजा था। इस पर लखनऊ सीबीआई प्रमुख ने मामले का संज्ञान लिया है।
हयासपुर के प्रेम सिंह यादव ने पूर्व में डीएम को पत्र देकर प्रधान पर गांव में मनरेगा धन के दुरुपयोग किए जाने की शिकायत की थी। पूर्व डीएम विजय किरन आनंद ने डीपीआरओ संजय बर्नवाल को जांच के आदेश दिए थे। जांच को पहुंचे डीपीआरओ को वीडीओ राज प्रकाश मौर्य मौके से गायब मिले थे।
बाद में डीपीआरओ ने वेबसाइट व खंड विकास अधिकारी द्वारा उपलब्ध कराए गए कुछ अभिलेखों की मदद से विकास कार्यों की हकीकत जानने का प्रयास किया था। जांच अधिकारी को गांव में पड़ताल के दौरान 3,26,229 रुपये का घोटाले की जानकारी हुई।
डीपीआरओ को घोटाले की इस धनराशि को प्रधान चंद्रपाल, वीडीओ राजप्रकाश मौर्य और तकनीकी सहायक से रिकवरी कराने के आदेश दिए थे। इसके बाद प्रधान के वित्तीय अधिकार सीज कर कार्यों के संपादन के लिए त्रिस्तरीय समिति का गठन कर दिया गया था।
बाद में मौजूदा डीएम ने सहायक अभियंता लघु सिंचाई से मामले की अंतिम जांच कराई। जांच में पूर्व में दिए गए कुछ बिंदुओं पर प्रधान, सचिव व तकनीकी सहायक पर दोष सिद्ध नहीं हुआ। इ
स पर डीएम ने आरोपों पर प्रधान चन्द्रपाल यादव, सचिव व तकनीकी सहायक को दोषमुक्त करते हुए प्रधान को वित्तीय/प्रशासनिक अधिकार वापस करने के आदेश जारी किए थे। शिकायतकर्ता प्रेम सिंह यादव ने सीबीआई लखनऊ से इसकी शिकायत की।
लखनऊ सीबीआई प्रमुख पी कुमार ने मुख्यालय अफसरों को पत्र भेजकर दुबारा जांच कराने के आदेश दिए। इसके बाद आयुक्त ग्राम्य विकास ने सीडीओ को पत्र भेजकर मामले की जांच कराने और एक सप्ताह में रिपोर्ट भेजने को कहा है। सीडीओ मनरेगा उपायुक्त ने मामले की जांच कराकर आख्या उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।