फर्जी एनजीओ के झांसे में आकर पढ़े लिखे बेरोजगार लाखों की रकम गवां बैठे। एनजीओ संचालक ने बेरोजगारों को रोजगार के सपने दिखाकर एक साल में करीब आठ लाख रुपये जमा कराए। इसके बाद लाखों की रकम लेकर संचालक फरार हो गया। मशक्कत के बाद जब कुछ जानकारी नहीं मिली तो गुरुवार को ठगी के शिकार युवक व युवतियां डीएम व एसपी कार्यालय पहुंचे। आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा न्याय की गुहार लगाई है।
न्यू शिक्षण संस्थान आरडीए कांपलेक्स जेल गार्डेन रोड रायबरेली के नाम एक एनजीओ ने जिले में भी दिसंबर 2016 में अपनी पैठ बिठाई। एनजीओ का निदेशक बने अर्जुन सिंह ने ब्लाक स्तर पर अपनी ब्रांच खोली। इसके ग्रेजुएट युवक व युवतियों को ब्लाक स्तर पर सहायक शिक्षक व विभिन्न विभागों में सुपरवाइजर की नियुक्ति का झांसा देकर प्रति युवक 20 से 25 हजार रुपये वसूली की।
नौ महीनों में फर्जी एनजीओ के झांसे में करीब तीन दर्जन युवक व युवतियां आए। फर्जी संचालक इनसे करीब आठ लाख रुपये इकट्ठा कर फरार हो गया। जालसाज के चक्कर में फंसे युवक व युवतियां मार्च माह से उनकी खोजबीन कर रहे हैं, लेकिन किसी तरह की कोई जानकारी नहीं मिली। युवकों ने रायबरेली में पता किया तो जानकारी हुई कि उक्त ऐसा कोई एनजीओ नहीं है। इस बीच युवक ने अपने सारे फोन नंबर भी स्विच ऑफ कर दिए।
लाखों की ठगी का शिकार बेरोजगार गुरुवार को डीएम से अपना दर्द बताने पहुंचे। डीएम की गैर मौजूदगी देख एसपी कार्यालय पहुंचे। जहां एसपी नेहा पांडेय को ठगी की दास्तान सुना न्याय की गुहार लगाई। एसपी ने रिपोर्ट दर्ज कराकर मामले की जांच का आश्वासन दिया है। इस दौरान ठगी का शिकार जमुनाशंकर, दिवाकर मिश्र, सुरेंद्र सिंह, रोहित कुमार, जन्मेजय कुशवाहा आदि मौजूद रहे।