अमर उजाला ब्यूरो
उन्नाव। विधायक कुलदीप सिंह प्रकरण में जिले की पुलिस एक बार फिर सवालों के घेरे में आ चुकी है। किशोरी के पिता के साथ मारपीट के मामले में गवाह यूनुस की मौत के बाद पुलिस ने सीबीआई को मामले की जानकारी देना ही जरूरी नहीं समझा था। तीन दिन बाद जब किशोरी के चाचा ने गवाह की मौत को हत्या बताई, तब जाकर पुलिस की नींद टूटी। इस बीच पुलिस ने बिना पोस्टमार्टम कराए ही गवाह की मौत की वजह बीमारी बता दिया। हालांकि अब जब मामला राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच चुका है, तब जाकर पुलिस ने अपने बचाव में पूरी ताकत झोंक दी। मांखी में शनिवार को पुलिस ने यूनुस के परिजनों को मनाने में हर हथकंडा अपनाया। मान मनौव्वल के साथ अपनी ताकत भी दिखाई।
किशोरी के पिता के साथ हुई मारपीट के मामले में मामले में सीबीआई ने यूनुस को गवाह बनाया था। यूनुस की बीते शनिवार को मौत हो गई थी। परिजनों ने मौत की सूचना दिए बगैर ही शव गांव में दफन करवा दिया था। इस बीच किशोरी के चाचा ने आरोप लगाया था कि यूनुस की हत्या कर दी गई है। हालांकि पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया। पर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने इसी मामले में ट्वीट कर मामले को तूल दे दिया था। इसके बाद जिले की पुलिस हरकत में आई थी, जिससे मौत के सात दिन बाद यूनुस के शव का पोस्टमार्टम कराने की कवायद शुरू हुई है।
गांव में बड़ी संख्या में फोर्स तैनात
विधायक प्रकरण में गवाह की मौत के बाद शनिवार को बड़ी संख्या में पुलिस बल गांव में तैनात रहा। इस दौरान ग्रामीण पल-पल की जानकारी लेने को उत्सुक दिखे। माखी के अलावा आसपास के गांव के लोग भी बड़ी संख्या में गांव पहुंच गए थे। यहां वह गवाह के घर से लेकर थाने तक की जानकारी लेते रहे।
पीड़िता के घर की बढ़ाई गई सुरक्षा
गवाह की मौत के बाद शव को कब्र से निकलवाने की कार्रवाई से गांव में आक्रोश को देखते हुए विधायक प्रकरण में पीड़िता किशोरी के घर की सुरक्षा और बढ़ा दी गई है। पुलिस को आशंका हुई कि आक्रोशित ग्रामीण पीड़िता या उसके परिवार को नुकसान न पहुंचा दें, इसके चलते एहतियातन पीड़िता के घर और आसपास पुलिस और पीएसी तैनात कर दी गई है।
-गवाह की मौत की सीबीआई को नहीं दी थी सूचना
-तीन दिन तक मामले को दबाए बैठी रही पुलिस
-बिना जांच पुलिस ने बीमारी से मौत की कर दी थी पुष्टि