उन्नाव। शासन की नई व्यवस्था से यूएसडीए के अस्तित्व पर छाए संकट के बादल छंट गए हैं। जिला प्रशासन के लगातार प्रयासों के बाद यूपीसीडा और यूएसडीए के बीच फंसा विकास क्षेत्र का पेच सुलझ गया है। लखनऊ-कानपुर हाईवे दोनों के बीच सरहद का काम करेगा। हाईवे से पूरब की तरफ के छह गांव यूपीसीडा जबकि पश्चिम तरफ के नौ गांव फिर से यूएसडीए के विकास क्षेत्र में शामिल किए गए हैं।
वर्ष 1983 में गठित यूएसडीए (उन्नाव-शुक्लागंज विकास प्राधिकरण) के विकास क्षेत्र में 43 गांव शामिल किए गए थे। हालांकि बाद के वर्षों में विभिन्न विभागों की शासकीय अधिसूचनाओं के माध्यम से 29 गांव अन्य विभागों में शामिल कर दिए गए। इससे यूएसडीए के विकास क्षेत्र में केवल 14 गांव ही बचे थे। चार मार्च 2021 को लीडा का विलय यूपीसीडा (उत्तर प्रदेश विकास प्राधिकरण) में हो गया। इससे यूएसडीए में शामिल 10 गांव यूपीसीडा में शामिल हो गए थे।
सिर्फ चार गांव बचने से यूएसडीए का अस्तित्व ही खतरे में था। उन्नाव ग्रामीण सहित 10 गांव जाने से प्राधिकरण के पास नगर पालिका परिषद से भी कम क्षेत्र बचा था। उन्नाव-शुक्लागंज विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष/कमिश्नर डॉ. रोशन जैकब और उपाध्यक्ष/डीएम गौरांग राठी ने प्राधिकरण के गांवों को पुन: यूएसडीए में शामिल करने का प्रस्ताव शासन को भेजा था।
यूपीसीडा के प्रमुख सचिव अनिल कुमार सागर ने दो सितंबर 2024 को पत्र जारी कर पूर्व की अधिसूचना में संशोधन की जानकारी दी है। नई व्यवस्था में लखनऊ-कानपुर हाईवे के पूर्वी तरफ के छह गांव यूपीसीडा में शामिल रहेंगे, जबकि हाईवे से पश्चिम तरफ के नौ गांव अब फिर यूएसडीए का हिस्सा होंगे। डीएम ने बताया कि यूएसडीए के पास लैंड बैंक न बचने से नई परियोजनाओं पर काम नहीं हो पा रहा था, गांव यूएसडीए में अपवर्तित होने से प्राधिकरण को राहत मिली है।
यूपीसीडा में ये गांव शामिल
- इब्राहिमाबाद, रजुआखेड़ा, चांदपुर, कोटरा, डीह और तुर्कमान नगर।
यूएसडीए में ये गांव शामिल
- उन्नाव ग्रामीण, शेखपुरनरी, बंथर, कड़ेर पतारी, गदनखेड़ा, सिंगरौसी, मुर्तजानगर, वाजिदपुर और झंझरी।
कटरी पीपरखेड़ा गांव में दोनों का दखल
गंगा एक्सप्रेसवे, कटरी पीपर खेड़ा गांव से निकला है। प्रमुख सचिव की ओर से जारी पत्र के अनुसार, इस गांव का एक्सप्रेसवे से प्रभावित क्षेत्रफल यूपीसीडा में और शेष भाग यूएसडीए में अधिसूचित माना जाएगा।
-
अब होगा मास्टर प्लान 2031 पर काम
उन्नाव-शुक्लागंज विकास प्राधिकरण ने वर्ष 2021 में मास्टर प्लान बनाया था। मास्टर प्लान की प्रगर्शनी लगाकर प्राधिकरण बोर्ड के सदस्यों और शहर वासियों से आपत्तियां व सुझाव लिए थे। इसके बाद मास्टर प्लान में आवश्यक संशोधन कर अंतिम रूप दिया लेकिन यह प्लान धरातल पर नहीं उतर सका। इस प्लान के अनुसार, प्राधिकरण क्षेत्र को वर्ष 2031 तक संभावित आबादी क्षेत्र और उस समय तक लोगों की जरूरतों के अनुसार विकास करना था। लेकिन मास्टर प्लान लागू करने के लिए प्राधिकरण के पास क्षेत्र ही न बचने से यह लागू नहीं किया जा सका। प्राधिकरण के सहायक अभियंता मो. इकरामुद्दीन ने बताया कि यूपीसीडा में गए गांव फिर से प्राधिकरण में अपवर्जित होने से राहत होगी।