-2009 में फर्जी तरीके से 47 ग्रामीणों को आवंटित हुई थी कृषि भूमि
- एसडीएम कोर्ट ने आवंटन रद्द कर भूमि ग्रामसभा को सौंपने के दिए निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
पुरवा। तहसील क्षेत्र के गांव चेतरा में वर्ष 2009 में किए गए 47 ग्रामीणों के भूमि आवंटन को तहसीलदार द्वारा गठित टीम ने जांच के दौरान फर्जी पाया। टीम की रिपोर्ट के आधार पर एसडीएम न्यायालय ने फर्जी आवंटन को रद्द कर भूमि को ग्राम सभा को सौंपने का निर्देश दिया।
वहीं, फर्जी आवंटन करने वालों की जांच 10 दिनों में पूरी करके दोषियों पर रिपोर्ट दर्ज कराने के निर्देश दिए। ग्राम सभा को सौंपी गई भूमि की कीमत 5.40 करोड़ है। तहसील क्षेत्र के गांव चेतरा में स्थित 27 बीघा 2 बिसुवा कृषि भूमि का आवंटन वर्ष 2009 में 47 ग्रामीणों को किया गया था।
जिनकी पूर्व में की गई जांच में अपात्र पाए गए लोगों का नाम सूची से हटा दिया गया था लेकिन बाद में विभागीय कर्मचारियों की मिलीभगत से इन लोगों का नाम फिर से शामिल करके खतौनी में दर्ज करा दिया गया था। जानकारी होने पर तहसीलदार विराग करवरिया ने तीन सदस्यीय टीम बनाकर जांच कराई।
टीम में शामिल कानूनगो रघुनंदन सिंह, लेखपाल आशू श्रीवास्तव व प्रशांत अवस्थी ने गांव पहुंचकर जांच की।जिसमें भूमि का फर्जी तरीके से आवंटन होना पाया गया। यह रिपोर्ट एसडीएम अतुल कुमार के पास पहुंची।
एसडीएम ने न्यायालय में मुकदमा दायर कराया और फिर सुनवाई के दौरान फर्जी आवंटन को रद्द कर भूमि को ग्रामसभा को वापस देने के निर्देश दिए। एसडीएम ने बताया कि दस दिनों के अंदर फर्जी भूमि आवंटन करने वाले कर्मचारी की जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश तहसीलदार को दिए गए हैं।