बीघापुर। करनईपुर गांव के बाहर जिस आतिशबाज के घर में धमाका हुआ वहां कई क्विंटल बारूद और पटाखे का भंडारण दिवाली के लिए किया गया था। यहां फोरेंसिक टीम को मिट्टी वाले अनार, सुतली, पटाखों के पाइप, गत्ते व अन्य सामान मिलने से पटाखे बनाने का काम होने की पुष्टि हो रही है। सीओ ने बताया कि सुनील के खिलाफ पटाखों का अवैध निर्माण और भंडारण की रिपोर्ट दर्ज की जा रही है।
गांव के बाहर के कच्चे घर में सुनील के पिता नन्हें लाल पहले पटाखा बनाने का काम करते थे। उनके पास इसका लाइसेंस था। वह पटाखे बनाकर दुकानों में सप्लाई करते थे। 24 जुलाई 2007 को पटाखा बनाने के दौरान बारूद में धमाका हुआ नन्हें लाल व उनके साथ काम करने वाले बीघापुर थाना क्षेत्र के पाली निवासी शिवकुमार की मौत हो गई थी। दोनों की मौत के बाद लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं हुआ। इससे सुनील चोरी छिपे पटाखे बनाने के साथ ही कानपुर से थोक में माल खरीदकर बड़े पैमाने पर भंडारण कर बिक्री करता था।
दो साल पहले अवैध कारोबार में वह भी जेल गया था लेकिन इसके बाद भी अवैध कारोबार कर रहा था। दिवाली को लेकर उसने भारी मात्रा में माल का स्टॉक किया था। सीओ ऋषिकांत शुक्ला ने बताया कि जिस तरह से दो मंजिला मकान खंडहर हुआ है, इससे भारी स्टॉक होने का अनुमान है। इसे लेकर सुनील के ठीक होने पर पूरी जानकारी ली जाएगी।
स्कूल गए थे बच्चे, नहीं तो और बड़ी होती घटना
सुनील रैदास के बच्चे प्रियांशु, मयंक और खुशी पास के ही एक निजी स्कूल में पढ़ते हैं। घटना के समय तीनों स्कूल गए हुए थे। अगर तीनों बच्चे भी घर में होते तो घटना और बड़ी हो सकती थी। बच्चों को जैसे ही जानकारी हुई वह सहम गए। एसडीएम क्षितिज द्विवेदी ने स्कूल पहुंचकर और बच्चों से बात की। इसके बाद तीनों को करनईपुर गांव से करीब चार किलोमीटर दूर उनकी ननिहाल कुतुबुद्दीन गढ़ेवा गांव भेज दिया। एसडीएम को बच्चों ने बताया कि पिता पटाखे खरीद कर लाते थे और बिक्री करते थे।
20 में मिनट में कई धमाके, 150 मीटर घरों की दीवारें हिलीं, भागे लोग
बारूदी धमाके इतने तेज थे कि धमक से 150 मीटर दूर घरों की दीवारें तक हिल गईं। लोग अपने घरों से भाग कर बाहर आ गए। धमाकों से एक किलोमीटर दूर टेढा गांव, दो किलोमीटर दूर गिरजानगर, अर्धुजपुर, कमरा जानापुर सहित आसपास के अन्य गांवों तक विस्फोट की आवाजें सुनाई दीं और आसमान में धुएं का गुबार नजर आया। ग्रामीणों ने बताया कि पटाखे की बिक्री तो सुनील करता था लेकिन यह पता नहीं था कि उसके पास लाइसेंस है या नहीं।
मलबे में मिले तीन लाख रुपये और सोने-चांदी के जेवर
घर ढहने के बाद जेसीबी से मलबा हटवाने के दौरान मलबे में दबा तीन लाख रुपये कैश और सोने-चांदी के जेवरात बरामद हुए हैं। थानाध्यक्ष धर्मेंद्रनाथ मिश्र ने बताया कि कैश और जेवर सुनील के परिजनों को सौंप दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि मलबे में दो सिलिंडर के साथ घर का अन्य सामान भी दबा मिला है। जो सही मिला उसे निकलवाकर सुरक्षित स्थान पर रखवाया गया है।
दो घंटे बंद रहा यातायात
घटना के दौरान रायबरेली हाईवे से ऊंचगांव को जाने वाले मार्ग पर दो घंटे तक यातायात बंद रहा। इससे दोनों तरफ लंबा जाम लग गया। रुक-रुक कर धमाके होने और मलबा दूर तक फैलने से पुलिस ने खतरे को भांपते हुए यातायात रोक दिया। इससे दोनों तरफ करीब दो किलोमीटर तक वाहनों की कतारें लगी रहीं।
मलबे में मिले गैस भरे तीन सिलिंडर, फटने से बचे
मलबा हटाने के दौरान पुलिस और अग्निशमन जवानों को रसोई में प्रयोग होने वाले तीन सिलिंडर भी मिले हैं। मलबा गिरने से दोनों काफी पिचक गए हैं। गनीमत रही कि सिलिंडर फटे नहीं वर्ना हादसा और बड़ा भी हो सकता था।
तहसील क्षेत्र में हुई विस्फोट की घटनाएं
बीघापुर तहसील क्षेत्र में साल 2002 में बिहार थानाक्षेत्र के कस्बा बिहार में इमामी आतिशबाज के निर्माण स्थल पर हुए विस्फोट में कल्लू तथा गज्जू की मौत हुई थी। घटना में रघुवीर गंभीर घायल हुए थे। साल 2004 में कस्बा पाटन में हुए विस्फोट में अनवर और नन्हकई के चीथड़े उड़ गए थे। साल 2004 में पाली गांव में आतिशबाज सलीम के यहां हुए विस्फोट में अकवाबाद निवासी ग्राहक सनद कुमार और शमीम की घटनास्थल पर मौत हो गई थी। घटना में राजापुर गढ़ेवा निवासी रामकुमार गंभीर घायल हुआ था। साल 2007 में बिहार कस्बा के परसंडा गांव में हुए विस्फोट में आतिशबाज गौस मोहम्मद की मौत होने के साथ दुकान ध्वस्त हो गई थी। अटवट गांव के साथ लालकुआं चौराहे पर भी आतिशबाजों की दुकानों में विस्फोट हुए थे लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ था।