उन्नाव। फर्जी शिकायतों की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रदेश सरकार ने नई व्यवस्था लागू की है। इसमें अब घोटाले या सरकारी धन के दुरुपयोग संबंधी शिकायतों के लिए शपथपत्र देना होगा। साथ ही शिकायतकर्ता को यह भी लिखकर देना होगा कि यदि शिकायत झूठी साबित हुई तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाए। चुनावी रंजिश या अन्य मामलों में खुन्नस निकालने के लिए लोग फर्जी शिकायतें कर देते हैं। बाद में जब प्रशासन जांच कराता है तो उनमें अधिकांश फर्जी मिलती हैं। जबकि जांच करने में अधिकारियों को समय और पैसा खर्च करना पड़ता है। अब फर्जी शिकायतों पर अंकुश लगाने के लिए शासन ने शपथपत्र की व्यवस्था शुरू की है। प्रदेश सरकार के सचिव महेंद्र कुमार ने जिला प्रशासन को भेजे गए पत्र में बताया है कि विकास कार्यों में घोटाले या सरकारी धन के दुरुपयोग की शिकायत करने वाले व्यक्ति को अपना व सूचना के स्रोतों का शपथपत्र या प्रमाण संलग्न करने होंगे। ऐसे मामलों की डीएम जिलास्तरीय अधिकारी को प्रारंभिक जांच के लिए आदेश दे सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि प्रधान के विरुद्ध शिकायत यदि किसी लोक सेवक द्वारा की जानी है तो उसे शपथपत्र आदि की व्यवस्था का अनुसरण करना आवश्यक नहीं होगा। सीडीओ प्रेमरंजन सिंह ने बताया कि शिकायतकर्ता को शपथपत्र में यह भी लिखकर देना होगा कि यदि शिकायत झूठी पाई गई तो उस पर भी कार्रवाई कर दी जाए।