कई बार पत्राचार किए जाने के बाद भी अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए गए। जिसे लोकपाल ने गंभीरता से लेते हुए मुख्य सचिव को पत्र भेजा। इसमें बताया कि सरकारी धनराशि के व्यय का हिसाब न देना भी वित्तीय अनियमितता की तरह मानते हुए 2.53 लाख की वसूली होनी चाहिए।
इसकी वसूली में रुचि न लेने और शिथिलता बरतने पर जिला विकास अधिकारी व खंड विकास अधिकारी को जिम्मेदार ठहराते हुए वसूली अवधि के अनुसार 12 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से 30427 रुपये की वसूली की संस्तुति की। भेजे गए पत्र में ब्याज सहित 283989 रुपये की कुल वसूली कराते हुए राजकोष में जमा कराने की बात कही।