मेडिकल कॉलेज की स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल
संवाद न्यूज एजेंसी
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सुल्तानपुर। संक्रामक बीमारियों के बढ़ते प्रकोप से मेडिकल कॉलेज की व्यवस्था चरमरा गई है। मरीजों की आमद से वार्डों के सभी 226 बेड भर गए हैं। स्थिति यह है कि अब बरामदे में भी बेड बढ़ाने पड़े हैं। इमरजेंसी की हालत तो और भी खराब है। यहां स्ट्रेचर लगाकर मरीजों का इलाज किया जा रहा है। प्राइवेट वार्ड के बरामदे में 23 अतिरिक्त बेड लगाकर मरीजों का इलाज किया जा रहा है।
मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी में सोमवार को 562 मरीजों का इलाज किया गया। पुरुष अस्पताल की ओपीडी में 1856 नए मरीजों का इलाज हुआ, जबकि 845 के करीब पुराने मरीज आए। यही हाल महिला अस्पताल का है। यहां 524 नए मरीज आए, जबकि 235 पुराने मरीजों का इलाज किया गया। मरीजों की तादाद बढ़ने से पंजीकरण व दवा वितरण काउंटर की व्यवस्था चरमरा गई। दवा वितरण केंद्र पर केवल एक महिला और एक पुरुष काउंटर है। इसकी वजह से मरीजों को पर्चा व दवा के लिए धूप में घंटों खड़े रहना पड़ा। फिजीशियन डॉ. अविनाश यादव ने बताया कि इस समय दस्त, बुखार व खांसी के सबसे ज्यादा मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं।
ओपीडी में फर्श पर बैठने को मजबूर मरीज
ओपीडी के बरामदे में बेंच की संख्या कम है। मरीजों की भारी भीड़ होने से जगह कम पड़ रही है। मरीज व तीमारदार फर्श पर बैठकर अपनी बारी का इंंतजार कर रहे हैं। मरीजों व तीमारदारों को फर्श पर बैठने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है।
संक्रामक बीमारियों के चलते भीड़ बढ़ी है। सीएचसी और पीएचसी में डॉक्टर मरीजों का इलाज करने के स्थान पर रेफर कर रहे हैं। यही कारण है कि मेडिकल कॉलेज में मरीजों की तादाद ज्यादा आ रही है। व्यवस्था देने का प्रयास किया जा रहा है। -डॉ. सलिल श्रीवास्तव, प्रधानाचार्य स्वाशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय सुल्तानपुर।