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Sultanpur News: मांगने पर भी सीजेएम को नहीं दी गई विसरा रिपोर्ट

Sun, 10 Dec 2023 12:49 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
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सुल्तानपुर। जिला जेल में दो बंदियों मनोज और विजय की हत्या को छिपाने के लिए जेल के अफसरों ने जमकर मेहनत की। उन्होंने न केवल उसकी मौत का वक्त छिपाया बल्कि अपने झूठे बयानों से भी सीजेएम की जांच को गुमराह करने का प्रयास किया। यहां तक कि मांगने के बावजूद जांच कर रहीं सीजेएम को विसरा रिपोर्ट तक नहीं उपलब्ध कराई गई। इसके बावजूद बयानों और परिस्थतिजन्य साक्ष्यों से ही सच सामने आ गया।
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तत्कालीन सीजेएम सपना त्रिपाठी ने जांच के दौरान पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सकों का बयान लिया तो उन्होंने साफ कर दिया कि दोनों की मौत 21 जून से पहले ही हो चुकी है। यह भी बताया कि दोनों को मरने से पहले जहर दिया गया था। दोनों के पेट में तरल ही था जिससे पता चलता है कि मौत से 12 घंटे पहले तक उन्होंने कुछ भी खाया-पीया नहीं था।

संभवत: उसी हाल में उन्हें फंदे से लटका दिया गया था। दोनों के शरीर पर चोटों के निशान भी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पाए गए थे। जेल अफसरों ने दावा किया था कि दोनों ने अवसाद में होने के कारण आत्महत्या की थी लेकिन जांच के दौरान बंदियों ने साफ बताया कि दोनों किसी तरह के अवसाद में नजर नहीं आ रहे थे बल्कि वे हंसी मजाक भी कर रहे थे।
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यही नहीं बंदियों ने यह भी बताया कि दोनों के पास चादर भी नहीं थी। ऐसे में उन्हें फांसी लगाने के लिए कपड़ा कहां से मिला? जेल अफसर इसका भी जवाब जांच में नहीं दे पाए हैं।



बैरक बदलने की बात भी अफसरों ने छिपाई
जांच में जेल अधीक्षक ने कहा कि बंदीगणों का बैरेक नहीं बदला गया था। वह शुरू से ही 19 नंबर अर्थात बच्चा बैरक में थे। किंतु प्रभारी जेलर कविता कुमारी व एक अन्य साक्षी सत्यम सिंह ने सीजेएम को बताया कि मनोज व करिया उर्फ विजय को बच्चा बैरक का कार्ड बनने से पहले बैरक नंबर 12 में रखा गया था। सत्यम सिंह के अनुसार मनोज व करिया ने बताया था कि हमारी ड्यूटी कैन्टीन में लगाई गई थी।





बैरक बदलने का लिया जाता है पैसा
जांच के दौरान जेल की एक बड़ी अव्यवस्था भी उजागर हुई है। जांच के दौरान पता चला है कि कैदियों का बैरक बदलने के लिए पैसे भी लिए जाते हैं। रिपोर्ट में सीजेएम ने बाकायदा इसका जिक्र भी किया है।




अभी राज है हत्या का कारण और समय
सीजेएम की विस्तृत जांच के बावजूद यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि आखिर उन दोनों की हत्या कब हुई है, क्यों हुई है और किसने की है? इसके लिए अब विधिवत जांच की जरूरत है। हालांकि जांच में कैदियों के बयानों से यह साफ हो गया कि मृत्यु से पहले दोनों किसी तरह के अवसाद में नहीं थे। ऐसे में अपनी मर्जी से आत्महत्या का कोई प्रश्न ही नहीं था। यह बात घटना के बाद मृतकों के परिजनों ने भी कही थी कि वे दोनों आत्महत्या नहीं कर सकते।



सीजेएम ने 20 लोगों से लिए बयान
जांच के दौरान तत्कालीन सीजेएम सपना त्रिपाठी ने पांच बंदी और कैदियों के अलावा तीन हेड वार्डर, दो वार्डर, मृतक मनोज के पिता रंगीलाल रैदास, मां सीतारानी, मृतक करिया पासी के भाई अशोक कु़मार, रिश्तेदार रविंद्र विजय, प्रभारी जेलर रीता श्रीवास्तव, कविता कुमारी, उप जेलर दरक्शा बानो, पोस्टमार्टम करने वाले दो डॉक्टरों और जेल अधीक्षक उमेश सिंह का बयान दर्ज किया।
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