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Sultanpur News: पांच करोड़ से स्थापित की जाएंगी तीन हाईटेक नर्सरी

Mon, 03 Apr 2023 12:15 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
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सुल्तानपुर। जिले में पांच करोड़ रुपये की लागत से तीन हाईटेक नर्सरियों की स्थापना कराई जाएगी। इनमें सब्जी व मसाले के उन्नतिशील पौधे तैयार किए जाएंगे। सब्जियों की खेती का दायरा बढ़ने से किसानों की आय में वृद्धि होगी। राज्य स्तर से नर्सरी की स्थापना व संचालन के लिए इम्पैनल्ड संस्था मेसर्स सांई समर्थ इरीगेटर्स अहमदनगर पुणे महाराष्ट्र से जिला उद्यान अधिकारी की ओर से एमओयू हस्ताक्षरित कर लिया गया है।
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उद्यान विभाग की दूबेपुर क्षेत्र की राजकीय पौधशाला दिखौली में 166.81 लाख रुपये से हाईटेक नर्सरी/हाईटेक वेजिटेबल सीडलिंग उत्पादन इकाई की स्थापना की जाएगी। दूसरी नर्सरी की स्थापना कूरेभार क्षेत्र के कमला नेहरू कृषि विज्ञान केंद्र के इटकौली प्रक्षेत्र में होगी। इसका भी निर्माण 166.81 लाख रुपये से किया जाएगा। तीसरी नर्सरी की स्थापना धनपतगंज क्षेत्र के कृषि विज्ञान केंद्र बरासिन में की जाएगी। इसका निर्माण 162.41 लाख रुपये से किया जाएगा।



जिला उद्यान अधिकारी रणविजय सिंह ने बताया कि तीनों हाईटेक नर्सरियों का निर्माण हो जाने के बाद उनमें सब्जी एवं मसाले के हाईब्रिड पौधे तैयार किए जाएंगे। नर्सरियों में विभिन्न प्रजातियों की सब्जी के पौधे तैयार होंगे। इनकी स्थापना व संचालन के लिए एमओयू हस्ताक्षरित कर लिया गया है। उम्मीद है कि इसी माह से नर्सरी की स्थापना का काम शुरू हो जाएगा।
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उद्यान निरीक्षक पवन कुमार सिंह ने बताया कि दूबेपुर, कूरेभार और धनपतगंज क्षेत्र में स्थापित होने वाली हाईटेक नर्सरी में सेमी ऑटोमेटिक सीडर मशीन, रूम फॉस्डिलिंग यूनिट, सीड जर्मिनेशन चैंबर, हार्डनिंग चैंबर, स्टोर रूम और टूल्स की सुविधा रहेगी।



इन आधुनिक मशीनों की मदद से शिमला मिर्च, हरी मिर्च, पत्ता गोभी, फूल गोभी, टमाटर व बैंगन समेत विभिन्न प्रजातियों की सब्जी एवं मसाले के लाखों पौधे तैयार किए जाएंगे। आने वाले समय में जिले के किसान सब्जियों की खेती से अपनी आमदनी बढ़ा सकेंगे।





जिला उद्यान अधिकारी रणविजय सिंह ने बताया कि तीनों हाईटेक नर्सरियों के लिए अतिरिक्त जिला कार्यक्रम समन्वयक व मुख्य विकास अधिकारी अंकुर कौशिक की ओर से स्वीकृति प्रदान की गई है। प्रत्येक नर्सरी का संचालन स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से कराया जाएगा। इकाई संचालन में होने वाली आय का वितरण स्वयं सहायता समूहों व संबंधित संस्थान जहां इकाई स्थापित की जा रही है, के बीच 80:20 के अनुपात में किया जाएगा।
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