सुल्तानपुर। मेडिकल कॉलेज के सीएमएस व वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. एसी गुप्ता के अनुसार,डीजे का तेज शोर सिर्फ कानों को ही नहीं, पूरी सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। निर्धारित ध्वनि सीमा 55 डेसिबल से अधिक आवाज के संपर्क में रहने से सुनने की क्षमता घटने, कानों में घंटी बजने और सिरदर्द की समस्या हो सकती है। लगातार शोर से नींद प्रभावित होती है और चिड़चिड़ापन, बेचैनी व मानसिक तनाव बढ़ सकता है। इससे रक्तचाप भी अस्थायी रूप से बढ़ सकता है। बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों के लिए तेज शोर अधिक परेशानी पैदा कर सकता है। ऐसे में ध्वनि मानकों का पालन और तेज आवाज से दूरी जरूरी है।-संवाद