विंदेश्वरीगंज। देवरा गांव में चल रही शिवमहापुराण कथा के सातवें दिन रविवार को कथा प्रवाचक ज्ञानेश्वर त्रिपाठी ने प्रवचन दिए। उन्होंने कहा कि शक्ति जब अहंकार का रूप लेती है, तो उसका अंत निश्चित होता है। उन्होंने भगवान शिव के तेज से उत्पन्न जालंधर की कथा सुनाई। कथा प्रवाचक ने बताया कि जालंधर अपनी पत्नी वृंदा के पतिव्रत धर्म के कारण अजेय था। उसने देवलोक पर विजय प्राप्त कर इंद्र का सिंहासन छीन लिया। अहंकार बढ़ने पर उसने माता पार्वती को प्राप्त करने के लिए कैलाश पर चढ़ाई की। धर्म की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने वृंदा के सतीत्व का प्रभाव समाप्त किया। इसके बाद भगवान शिव ने जालंधर का वध कर अधर्म का अंत किया। देवताओं को उनका खोया वैभव वापस मिला। कथा के अंत में मुख्य यजमान मिथलेश और हरिशंकर तिवारी ने व्यासपीठ की आरती उतारी। संतोष तिवारी, सुधीर श्रीवास्तव, ज्ञान शंकर तिवारी, संजय, ललित, विनय, अनुराग, निशांत, अमित, प्रशांत सहित बड़ी संख्या में श्रोता मौजूद रहे।