सुल्तानपुर। शिक्षा क्षेत्र के निजीकरण की शुरुआत हो गई है। शासन ने जिले की दो राजकीय आईटीआई को टाटा कंपनी को सौंप दिया है। अब दोनों जीआईटीआई का संचालन अगले वित्तीय वर्ष से टाटा की ओर से किया जाएगा। कंपनी की ओर से सर्वे कराने की तैयारी चल रही है।
जिले में अभी तक तीन राजकीय आईटीआई का संचालन शासन की ओर से किया जा रहा था। इनमें से सुल्तानपुर व लंभुआ जीआईटीआई को टाटा को सौंपे जाने के बाद अब सिर्फ कादीपुर जीआईटीआई का संचालन शासन की ओर से किया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक शासन की ओर से प्रदेश की करीब 150 जीआईटीआई को टाटा के हाथों में सौंपा गया है। इसके पीछे अधिकारियों की ओर से आईटीआई में प्रशिक्षण का स्तर बेहतर बनाने की वजह बताई जा रही है।
अधिकारियों के मुताबिक टाटा की ओर से ली गई दोनों जीआईटीआई में सर्वे कराने की तैयारी चल रही है। सर्वे के बाद जरूरत के हिसाब से नए कोर्स संचालित किए जाएंगे। इसके लिए कंपनी की ओर से नया वर्कशॉप व भवन आदि का भी निर्माण कराया जाएगा। संस्थान के लिए नए प्रशिक्षक भी लाए जाएंगे। फिलहाल शुरुआती दौर में प्रवेश की सभी प्रक्रिया जीआईटीआई की ओर से की जाएगी।
जिले में संचालित तीनों जीआईटीआई में 1108 सीटें हैं। इनमें विभिन्न ट्रेडों की सीटें शामिल हैं। सुल्तानपुर जीआईटीआई की छात्र क्षमता सर्वाधिक 456, लंभुआ की 372 व कादीपुर की सबसे कम 280 है। अधिक छात्र क्षमता वाली दोनों जीआईटीआई को टाटा को सौंपा गया है।
राजकीय आईटीआई में मौजूदा समय में इलेक्ट्रिक, इलेक्ट्रॉनिक्स के अलावा मोटर मैकेनिक, डीजल मैकेनिक, फिटर, टर्नर, मशीनिष्ट, वेल्डर, फैशन डिजाइनिंग समेत कई ट्रेड संचालित हैं।
राजकीय आईटीआई के प्रधानाचार्य अरुण कुमार ने बताया कि छात्रों को आधुनिक व बेहतर प्रशिक्षण देने के लिए शासन ने दोनों जीआईटीआई को टाटा को दिया है। इसमें सरकार की सिर्फ भूमि रहेगी, भवन व वर्कशॉप समेत अन्य चीजें टाटा की रहेंगी।