सुल्तानपुर। जिले में स्वास्थ्य विभाग से लेकर चिकित्सा शिक्षा विभाग तक डॉक्टरों की भारी किल्लत है। डॉक्टरों के करीब 125 पद खाली हैं। 10 से ज्यादा सीएचसी फार्मासिस्ट संभाल रहे हैं जबकि अल्ट्रासाउंड और वेंटीलेटर जैसी जीवन रक्षक मशीनें विशेषज्ञों के अभाव में ठप पड़ी हैं। इस संकट से मरीज परेशान हैं और अधिकारी शासन से पत्राचार कर रहे हैं।
जिले में 45 पीएचसी और 14 सीएचसी हैं। यहां चिकित्सकों के कुल 165 पद सृजित हैं लेकिन डाॅक्टरों की उपलब्धता केवल 65 ही है। ऐसे में अधिकारियों ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर तो अधीक्षक समेत डॉक्टरों की तैनाती कर रखी है लेकिन 10 पीएचसी हैं जहां कोई डाॅक्टर नहीं है। इसलिए यहां एलोपैथ की दवाएं देने का काम फार्मासिस्ट ही कर रहे हैं। यहां तक कि जन आरोग्य मेलों में भी वे ही मरीजों को देखते हैं। जाहिर है कि इन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर जहां डॉक्टर तैनात ही नहीं हैं, वहां मरीज नाममात्र के ही जाते हैं।
उधर, चिकित्सा शिक्षा विभाग के मेडिकल कॉलेज की बात करें तो यहां पुरुष चिकित्सालय में ही 33 में से 16 चिकित्सकों की कमी है। रेडियोलॉजिस्ट से लेकर बेहोशी के डॉक्टर तक के पद खाली पड़े हैं। ऐसे में मेडिकोलीगल का काम भी बुरी तरह प्रभावित है।
सीएमओ कार्यालय से अटैच डॉक्टर दो घंटे के लिए यहां मेडिकोलीगल के लिए आते हैं। रेडियोलॉजिस्ट न होने के कारण मेडिकोलीगल के अलावा अल्ट्रासाउंड जांच का काम भी बंद पड़ा है। उधर, बेहोशी के डॉक्टर न होने की वजह से मेडिकल कॉलेज के ज्यादातर वेंटीलेटरों का इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है।
अब महिला चिकित्सालय में सीएमएस का पद भी खाली
मेडिकल कॉलेज में महिला चिकित्सालय में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक का भी तबादला हो गया है। ऐसे में यह पद भी कार्यवाहक के हवाले हो गया है। इससे यहां एक चिकित्सक की कमी और हो गई है। इसके साथ ही प्रशासनिक कामकाज भी प्रभावित हो रहा है।
आठ महीने से अल्ट्रासाउंड बंद
पुरुष चिकित्सालय में आठ महीने पहले रेडियोलाॅजिस्ट का तबादला हो जाने के बाद से अल्ट्रासाउंड केंद्र में ताला लटक गया। मजबूरन अब मरीजों को बाहर से महंगे दाम पर अल्ट्रासाउंड कराना पड़ता है।
शासन से की गई चिकित्सकों की मांग
चिकित्सकों की मांग शासन से की गई है। जिस पीएचसी पर एलोपैथ के डॉक्टर नहीं हैं, वहां पर आयुष के डॉक्टरों को लगाया गया है। जैसे ही शासन से तैनाती होगी, ये सारे पद भर दिए जाएंगे। इसके लिए निरंतर प्रयास चल रहा है।
- डॉ. डीके त्रिपाठी, सीएमओ
प्राचार्य के स्तर पर चल रही लिखापढ़ी
विशेषज्ञ चिकित्सकों की भारी कमी है जिससे काम प्रभावित हो रहा है, यह कमी पूरे प्रदेश में है। इसके लिए प्राचार्य के स्तर पर लिखापढ़ी चल रही है। उम्मीद है कि जल्द ही रेडियोलॉजिस्ट और एनेस्थेसिया के डॉक्टरों की तैनाती हो जाएगी।
- डॉ. एसके गोयल, सीएमएस, पुरुष अस्पताल