सुल्तानपुर। मेडिकल कॉलेज के पुरुष जिला अस्पताल की ओपीडी में मंगलवार को जमकर हंगामा हो गया। मरीज के तीमारदार जब दवा जन औषधि केंद्र से खरीद लाए तो जूनियर डॉक्टर भड़क गया। आरोप है कि उसने तीमारदार से मारपीट की जिसमें तीमारदार के कपड़े तक फट गए। जन औषधि केंद्र के प्रबंधक ने इस बात का तीखा विरोध किया है। जिसके बाद सीएमएस ने पूरे प्रकरण की जांच शुरू करा दी है।
लंभुआ तहसील क्षेत्र के मदनपुर पनियार निवासी चंदन (22) कई दिनों से बुखार से पीड़ित था। शनिवार को उसने ओपीडी में डॉक्टर को दिखाकर दवा ली थी, जिससे उसे राहत नहीं मिली थी। ऐसे में वह मंगलवार सुबह करीब 11 वह अपने भाई ऋषभ पांडेय के साथ फिर ओपीडी पहुंचा। यहां बैठे जेआर ने उससे कहा कि जो दवा लिखी गई है, उसे ही दोबारा खरीद लें और पांच दिन खाएं। जन औषधि केंद्र से दवा लेकर जब मरीज और तीमारदार दोबारा डॉक्टर के पास पहुंचे तो वह भड़क गए। कहा कि यह दवा सही नहीं है। वापस बदलकर जो दवा पर्ची पर लिखी है, बाहर मेडिकल स्टोर से लेकर आइए। जब जन औषधि केंद्र में ऋषभ दवा वापस करने गए तो केंद्र के प्रबंधक मुकेश श्रीवास्तव ऋषभ खुद उनके साथ ओपीडी चले गए।
जब उन्होंने जन औषधि केंद्र की दवा को गलत बताने का विरोध किया तो आरोप है कि जूनियर डॉक्टर ने मरीज के भाई ऋषभ के साथ गाली गलौज शुरू कर दी और कॉलर पकड़कर मारना शुरू कर दिया। जिससे उसके कपड़े फट गए। यह देखकर नाराज जन औषधि केंद्र के प्रबंधक मुकेश ने सीएमएस से इसकी शिकायत की। उन्होंने कहा कि यह गंभीर मामला है। जिसकी शिकायत प्राचार्य से भी की जाएगी।
कमेटी गठित कर कराई जा रही जांच
ओपीडी के जूनियर डॉक्टर और मरीज के परिजन के साथ हुई मारपीट के लिए जांच कमेटी गठित कर दी गई है। जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. एसके गोयल, सीएमएस।
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कमीशन के लिए बाहर से लिखी जाती हैं दवाएं
सुल्तानपुर। जो दवाएं जन औषधि केंद्र में उपलब्ध हैं उन्हें भी मेडिकल कॉलेज के डाॅक्टर बाहर से सिर्फ इसलिए लिख रहे हैं क्योंकि इन दवाओं पर उन्हें अच्छा खासा कमीशन मिल जाता है। यही वजह है कि वे मरीज पर दबाव बनाते हैं कि वह दवा बाहर से ही खरीदें। जबकि जन औषधि केंद्र के प्रबंधक के अनुसार जीवन रक्षक दवाओं से लेकर खांसी, सर्दी जुकाम, एंटीबॉयोटिक, दर्द, आयरन, कैल्सियम आदि सभी प्रकार की दवाएं केंद्र पर उपलब्ध हैं।