सुल्तानपुर। माह-ए-रमजान के आखिरी शुक्रवार को मुस्लिम समुदाय के लोगों ने जिले के 1,014 मस्जिदों में अलविदा जुमा की नमाज अदा की। रोजेदारों ने मुल्क की बेहतरी और अमन चैन के लिए दुआएं मांगीं। इस दौरान सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस प्रशासन अलर्ट रहा।
शिया जामा मस्जिद अमहट में मौलाना मोहम्मद जाफर खान ने दोपहर 12:30 बजे अलविदा जुमा की नमाज अदा कराई। उन्होंने तकरीर में कहा कि हर नौजवान को शिक्षा पर अधिक ध्यान देना चाहिए। सुखमय जीवन के लिए शिक्षा बहुत ही जरूरी है। उन्होंने बताया कि जिले में करीब 40 शिया समुदाय की मस्जिदें हैं। पांच किलोमीटर के क्षेत्र में जहां आबादी अधिक है, वहीं जुमा की नमाज हो सकती है। इस प्रकार 14 मस्जिदों में नमाज अदा की गई। शिया की सबसे बड़ी जामा मस्जिद अमहट है। उधर, जयसिंहपुर तहसील क्षेत्र के वक्फ जामा मस्जिद हयातनगर में भी अलविदा जुमा की नमाज अदा की गई। यहां पर नमाज में छोटे-छोटे बच्चे भी शामिल हुए।
शहर के चौक स्थित जामा मस्जिद के पेश इमाम मौलाना अब्दुल लतीफ ने अलविदा जुमा की नमाज दोपहर 1:15 बजे अदा कराई। कहा कि जिले में लगभग 1,000 मस्जिदों में अलविदा जुमा की नमाज अदा की गई। मरकज मस्जिद में मौलाना मोहम्मद उस्मान कासमी ने नमाज अदा कराई। जामिया इस्लामिया में मौलाना मोहम्मद ओसामा कासमी, बीबिया मस्जिद में मौलाना कसीम कासमी, हनीफ नगर की मस्जिद में मौलाना अंजर, गभड़िया नस्सरगंज मस्जिद में मौलाना अकरम खान व पौशाला मस्जिद में हाफिज तौहीद ने अलविदा जुमा की नमाज अदा कराई। मौलाना अब्दुल लतीफ ने कहा मान्यता है कि अलविदा जुमा पर नमाज पढ़ने वालों की अल्लाह मन्नत पूरी करता है। ईद के चांद से पहले का यह आखिरी जुमा होता है।
मदहे सहाबा का निकला जुलूस
सुल्तानपुर। हर साल की तरह इस बार भी शुक्रवार को अलविदा जुमा की नमाज अदा करने के बाद मदहे सहाबा का जुलूस निकाला गया। इसकी बुनियाद मौलाना अब्दुल फारूकी ने 75 वर्ष पूर्व डाली थी। जुलूस की अगुवाई मौलाना मोहम्मद कासीम कासमी, मौलाना मोहम्मद उस्मान कासमी, मौलाना मताहरुस्सालाम कासमी ने की। जुलूस बीबिया मस्जिद से शाहगंज चौराहा, डाकखाना चौराहा, गंदानाला रोड से चौक घंटाघर होते हुए खैराबाद स्थित जामिया इस्लामिया मदरसा में जाकर खत्म हुआ। जुलूस के दौरान नातिया कलाम पेश किए गए। इस मौके पर राष्ट्रीय सामाजिक सेवा संघ के निजाम खान, परवेज करीम, दानिश खान, सूफियान खान व उमर फैज मौजूद रहे।