सुल्तानपुर। जिले के 18 ग्राम प्रधानों व पंचायत सचिवों ने करीब 60 लाख रुपये का वारा न्यारा कर डाला। ग्राम पंचायतों के हुए विशेष ऑडिट में इसका खुलासा हुआ है। विशेष टीम को तत्कालीन प्रधान व पंचायत सचिव भुगतान के रिकॉर्ड नहीं दिखा सके। इस पर डीएम व डीपीआरओ ने आरोपी प्रधानों व पंचायत सचिवों को नोटिस जारी किया है।
विशेष ऑडिट की टीम ने वित्तीय वर्ष 2014-2015 में सरकारी धनराशि से कराए गए कार्यों के भुगतान की जांच में दो ग्राम पंचायतों में घोटाला होना पाया। वित्तीय वर्ष 2015-2016 की जांच में सात ग्राम पंचायतों में लाखों रुपये का घोटाला सामने आया है। इसी तरह वित्तीय वर्ष 2016-2017 में कराए गए कार्यों के भुगतान में नौ ग्राम पंचायतों में अनियमितता मिली। तीनों वित्तीय वर्ष में 18 ग्राम पंचायतों के तत्कालीन प्रधानों व तत्कालीन पंचायत सचिवों की ओर से विभिन्न कार्यों के मद में करीब 60 लाख रुपये मनमाना भुगतान किया गया।
विशेष ऑडिट में घोटाला का खुलासा होने पर डीएम कृत्तिका ज्योत्स्ना ने 18 ग्राम पंचायतों के तत्कालीन प्रधानों और डीपीआरओ ने तत्कालीन पंचायत सचिवों को नोटिस जारी करते हुए साक्ष्य समेत जवाब मांगा है। आरोपियों को दो माह के भीतर साक्ष्यों समेत जवाब लेखा परीक्षक के सामने प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। बताया जा रहा है कि इसमें दो आरोपी पंचायत सचिवों व एक तत्कालीन प्रधान की मौत हो चुकी है। इसमें कई पंचायत सचिव सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
तत्कालीन डीपीआरओ भुगतान को करते रहे नजरअंदाज
नियम के मुताबिक ग्राम पंचायतों में ग्राम प्रधानों व पंचायत सचिवों की ओर से राज्य वित्त व केंद्रीय वित्त समेत विभागीय धनराशि से कराए जाने वाले कार्यों के भुगतान पर नजर रखने के निर्देश हैं। शासन की इस व्यवस्था को तत्कालीन डीपीआरओ नजरअंदाज करते रहे और भुगतान होता रहा। नतीजतन 18 ग्राम पंचायतों में करीब 60 लाख रुपये का वारा-न्यारा कर दिया गया। कहा जा रहा है कि उस समय विभागीय अधिकारियों की ओर से भुगतान की जांच की गई होती तो सरकारी राशि का इतने बड़े पैमाने पर दुरुपयोग न हुआ होता।
कहां कितना हुआ घोटाला
विशेष ऑडिट टीम ने वित्तीय वर्ष 2014-15 के कार्यों में मोतिगरपुर की अहदा में 2,50,841 लाख, शेषपुर में 1,56,582 रुपये का गोलमाल पकड़ा है। वित्तीय वर्ष 2015-16 में मोतिगरपुर की हमजाबाद में 4,59,289, लंभुआ के हरिहरपुर में 3,63,200, जगन्नाथपुर में 3,64,000, वेदूपारा में 2,64,400, घाटमपुर उत्तरी में 2,94,091, तातोमुरैनी में 5,30,000 व परसुरामपुर में 2,86,000 लाख रुपये का घोटाला समाने आया। वित्तीय वर्ष 2016-17 में कुड़वार के नौगवां रायतासी में 4,53,190, नौगवांतीर में 1,25,760, धनपतगंज के सेवरा में 2,70,180 व ब्राह्मिपुर में 4,30,373, अखंडनगर के डोमापुर में 1,26,000, दोस्तपुर के सुखऊपुर अशरफपट्टी में 9,82,354 व नरसिंहपुर में 5,09,400, लंभुआ के सबसुखपुर में 2,97,000 व परसुरामपुर में 1,49,118 रुपये का घोटला पकड़ा गया है।
डीपीआरओ को रखना चाहिए था रिकॉर्ड
पुराना मामला होने की वजह से आरोपी ग्राम पंचायतें ऑडिट में भुगतान का केवल रिकॉर्ड नहीं दिखा सकी हैं। इसी वजह से टीम घोटाला मान रही है, जबकि अमूमन ग्राम पंचायतों की ओर से कार्य कराया गया है। फिलहाल तत्कालीन डीपीआरओ को इस पर नजर रखनी चाहिए थी। साथ ही रिकॉर्ड रखवाना चाहिए था।
- अभिषेक शुक्ल, जिला पंचायतराज अधिकारी