सुल्तानपुर। दुर्गा पूजा महोत्सव के लिए पूजा समितियों ने पंडालों को सजाने का काम शुरू कर दिया है। भारत में कोलकाता के बाद दुर्गा पूजा महोत्सव का विशाल स्वरूप शहर में देखने को मिलता है। यहां पर दशहरे के दिन से महोत्सव की रंगत में निखार आता है। दूरदराज से लोग दुर्गा पूजा महोत्सव की झलक देखने आते हैं। कोलकाता व झारखंड से आए कारीगर पंडालों में विभिन्न तीर्थस्थलों का रूप देंगे।
विशाल पंडालों में देश-विदेश के मंदिरों के स्वरूप देखने को मिलते हैं। महोत्सव में अनवरत शहर में जगह-जगह भंडारे और जागरण का आयोजन किया जाता है। मां के भक्तों की भीड़ शाम होते ही पंडालों में उमड़ने लगती है। हर साल की तरह इस बार भी दुर्गा पूजा महोत्सव की तैयारियां शहर में शुरू हो गईं हैं। मूर्तिकारों ने देवी प्रतिमाओं को जीवंत रूप देने का कार्य शुरू कर दिया है।
केंद्रीय पूजा व्यवस्था समिति के महामंत्री सुनील कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि शहर में 130 से अधिक देवी पंडाल बनाए जाएंगे। शहर के विभिन्न स्थानों पर पंडालों के निर्माण के लिए समिति के पदाधिकारियों ने बांस-बल्ली लगाना शुरू कर दिया है। ठठेरी बाजार में बड़ी दुर्गा और गल्ला मंडी में अन्नपूर्णा माता का पंडाल बनना शुरू हो गया है।
1959 में हुई दुर्गा पूजा की शुरुआत
शहर के ठठेरी बाजार में वर्ष 1959 में भिखारीलाल सोनी और उनके साथियों ने मिलकर पहली दुर्गा प्रतिमा की स्थापना की थी। यहां से शुरू हुआ दुर्गा पूजा का सिलसिला समय के साथ बढ़ता गया। दूसरी मूर्ति की स्थापना रुहट्टा गली में बंगाली प्रसाद सोनी ने 1961 में कराई थी। वर्ष 1970 में दो प्रतिमाएं और जुड़ीं। इसके बाद कालीचरन ने श्री संतोषी माता और राजेंद्र प्रसाद ने मां सरस्वती की प्रतिमा की स्थापना कराई थी। वर्ष 1973 में श्री अष्टभुजी माता, श्रीअंबे माता, श्रीगायत्री माता, श्री अन्नपूर्णा माता की स्थापना के साथ ही दुर्गा पूजा महोत्सव में तब्दील हो गया। शहर के दुर्गापूजा महोत्सव से प्रेरित होकर जिले केे सभी तहसीलों व कस्बों में भी अब देवी प्रतिमाओं की स्थापना की जाने लगी है।
62 पंडालों के लिए तैयार कर रहे देवी प्रतिमाएं
शहर के सिविल लाइन इलाके में देवी प्रतिमाओं के निर्माण का काम जोर-शोर से चल रहा है। मूर्तिकार रविन कुमार पाल ने बताया कि उनके यहां 62 पंडालों के लिए देवी प्रतिमाएं तैयार की जा रही हैं। यहां से बनने वाली देवी प्रतिमाएं शहर के अलावा लखनऊ, गोंडा, आजमगढ़, प्रतापगढ़, अयोध्या समेत कई जिलों में जाएंगी। इसके लिए लोगों ने पहले से ही बुकिंग कराई है।
तीन अक्तूबर से शुरू होगा शारदीय नवरात्र
कथा व्यास बृजेशाचार्य महाराज ने बताया कि तीन अक्तूबर से शारदीय नवरात्र शुरू होगा। पहले दिन पंडाल के साथ ही घरों में भी कलश स्थापना की जाएगी। पंडालों में पांचवें दिन से देवी प्रतिमाओं की स्थापना होने लगती है। अष्टमी के दिन नेत्र पूजन के बाद श्रद्धालुओं को दर्शन करने के लिए देवी पंडाल के पट खोल दिए जाते हैं। विजयादशमी 12 अक्तूबर से महोत्सव की रंगत शुरू हो जाएगी।