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मुलायम के एक फैसले ने बदल दी थी भाजपा के गढ़ की तस्वीर

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सुल्तानपुर। वाकया 2007 के विधानसभा चुनाव का है। चुनाव की बिसात सजने लगी थी। उस पर गोटियां सेट करने का कार्य जोर पकड़ लिया था। समाजवादी पार्टी की सरकार थी। ऐसे में जाहिर तौर पर टिकट की सर्वाधिक मारामारी भी इसी दल में थी। सुल्तानपुर विधानसभा सीट पर भी दावेदारों की लंबी फेहरिस्त थी। दावेदारों में अधिकतर अपना टिकट पक्का मानकर चल रहे थे। इस गहमागहमी के बीच आई समाजवादी पार्टी के प्रत्याशियों की सूची ने बड़े-बड़े सियासतदां की पेशानी पर बल दिया।
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सूची में सुल्तानपुर सीट से अनूप संडा का नाम था। तब तक अनूप संडा की समाजवादी पार्टी में खास पहचान नहीं थी। वे जिले में तीन वजहों से जाने जाते थे। पहला वे समाजवादी नेता त्रिभुवन नाथ संडा के पुत्र थे। दूसरा बड़े समाजसेवियों में शुमार होते थे। तीसरा कुछ दिनों पहले ही वे नगर पालिका के चेयरमैन का चुनाव बतौर निर्दलीय प्रत्याशी मात्र 256 मतों से हार गए थे। ऐसे में हर कोई मुलायम सिंह यादव के फैसले से अचंभित था। अधिकतर लोगों का मानना था कि यह चुनाव अनूप संडा के लिए आसान नहीं होगा लेकिन चुनाव नतीजों ने एक बार फिर सबको हैरान कर दिया। अनूप संडा को चुनाव में भाजपा का गढ़ समझी जाने वाली सीट पर जीत हासिल हुई थी। उस चुनाव में समाजवादी पार्टी के अधिकतर प्रत्याशी चुनाव हार गए था।
पूर्व विधायक अनूप संडा बताते हैं कि नेताजी राजनीति के मर्मज्ञ थे। समय की नब्ज भांप लेना उनकी सबसे बड़ी खूबी थी। विपरीत परिस्थितियों में भी सुल्तानपुर सीट पर मुलायम सिंह यादव का फैसला कारगर साबित हुआ। चुनाव जीतने के बाद अनूप संडा पहली बार लखनऊ में नेताजी से मिलने पहुंचे तो उनके साथ मो. आजम खान समेत कई वरिष्ठ नेता बैठे हुए थे। अनूप संडा के कमरे में प्रवेश के साथ ही नेताजी के मुंह से बरबस यह निकल पड़ा, देखो जीतकर आ गया। अनूप संडा बताते हैं नेताजी के भरोसे, विश्वास व अपनेपन को वे जीवन की अंतिम सांस तक नहीं भूलेंगे।
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बरकत अली के यहां भोजन और हरिचरण के घर धुलते थे नेताजी के कपड़े
सुल्तानपुर। सपा के संरक्षक मुलायम सिंह यादव दिल से भी मुलायम थे। सादगी ऐसी कि पार्टी कार्यकर्ता के घर पर ही खाना खाते थे। प्रचार के दौरान जब कपड़ा गंदा हो जाए तो वह भी कार्यकर्ता के घर ही धुलने जाता था। नशे से हमेशा दूर और शाकाहारी भोजन करने वाले नेताजी प्रतिदिन सुबह दूध पीते थे।
शहर के खैराबाद निवासी सपा के पूर्व जिला महासचिव मोहम्मद अहमद खां ने बताया कि उनके चाचा बरकत अली खां शुरू से मुलायम सिंह से जुड़े थे। वर्ष 1980 में वे कक्षा छह में पढ़ते थे। तब नेताजी सुल्तानपुर आने पर डाक बंगले में ठहरते थे। रोज शाम को नेताजी घर पर भोजन करने आते थे। उस समय पार्टी से हरिचरण यादव भी जुड़े थे। प्रचार के दौरान जब नेताजी के कपड़े गंदे हो जाते तो उसे धुलने के लिए हरिचरण यादव के घर भेजा जाता था। नेताजी प्रतिदिन सुबह दूध पीते थे। वे घर से डाक बंगले दूध लेकर जाते और नेताजी को पिलाते थे। वर्ष 1989-90 के बीच का दिन था। घर पर नेताजी मुलायम सिंह यादव और बेनी प्रसाद वर्मा पहुंचे थे। नेताजी ने बेनी प्रसाद वर्मा से मजाकिया लहजे में कहा, बेनी यहां भोजन बना है। बेनी प्रसाद वर्मा के मुंह से निकला नेताजी आप जहां जाते हैं, वहां भोजन ही बनता है। इसके बाद लोग ठहाके लगाकर हंस पड़े। यहां भोजन का मतलब शाकाहार से था। बाद में नेताजी ने बरकत अली को पार्टी से टिकट देकर सदर से विधायक बनाया था।
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