सुल्तानपुर। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के 14 वर्ष बाद भी हत्या के मामले में सजायाफ्ता हत्या के अभियुक्त को पुलिस ढूंढ़ नहीं पा रही है। अदालत से अभियुक्त की गिरफ्तारी के लिए एसपी व अन्य अधिकारियों के पास कई पत्र भेजे जा चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 2009 में ट्रायल कोर्ट से सुनाई गई उम्रकैद की सजा को बहाल कर अभियुक्त को जेल भेजने का आदेश दिया था। मामले में अगली सुनवाई 15 जून को होगी।
अमेठी जिले के गौरीगंज थाने के रंजीतपुर कटरा लालगंज गांव निवासी राम अभिलाख द्विवेदी की दो नवंबर 1981 को हत्या कर दी गई थी। मामले में सरैया मानिकचंद मौजा कटरा लालगंज निवासी शोभनाथ, त्रिवेणी प्रसाद, विजय पाल, दूधनाथ, हंसराज व सुधाकर के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया गया था।
16 अगस्त 1984 को जिला न्यायालय ने अभियुक्तों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ अभियुक्तों की दायर की गई अपील पर हाईकोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया था। इसी बीच जेल से छूटने के बाद अभियुक्तों ने दो मई 1994 को राम अभिलाख के पुत्र पारसनाथ की भी हत्या कर दी थी।
हाईकोर्ट के बरी करने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने आठ मई 2009 को ट्रायल कोर्ट से अभियुक्तों को सुनाई गई उम्रकैद की सजा को बहाल कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने सभी दोषियों को सजा भुगतने के लिए जेल भेजने का आदेश दिया था।
इसके बाद अन्य अभियुक्त सरेंडर कर जेल गए लेकिन अभियुक्त शोभनाथ फरार हो गया। कोर्ट के आदेश पर उसकी संपत्ति की कुर्की भी पुलिस कर चुकी है। करीब 14 वर्ष बीत जाने के बाद भी पुलिस अभियुक्त को नहीं ढूंढ़ पाई है।
उसकी गिरफ्तारी के लिए कोर्ट से अमेठी जिले के एसपी से लेकर अन्य अधिकारियों को कई पत्र भेजे जा चुके हैं। मौजूदा समय में मामला एडीजे सप्तम राम विलास प्रसाद कोर्ट में लंबित है। इसमें सुनवाई के लिए 15 जून की तिथि नियत की गई है।