सुल्तानपुर। मेडिकल कॉलेज में रविवार को इमरजेंसी वार्ड में मरीजों के साथ-साथ तीमारदार भी असहाय नजर आए। डॉक्टर बातचीत में मशगूल दिखे। मरीजों के कराहने से उनके परिजन इलाज सही नहीं करने की दुहाई देते रहे।
रविवार दोपहर दो बजे तक 150 मरीज इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड में पहुंचे। इस दौरान मेडिकल वार्ड में बेड कम होने पर स्ट्रेचर पर ही डॉक्टर इलाज करने लगे और वार्ड ब्वाय दूसरे स्ट्रेचर की व्यवस्था में लग गए। रविवार को ओपीडी बंद रहने से परेशानी और बढ़ गई।
लंभुआ से आई शकुंतला के तीमारदार ने बताया कि सांस लेने में दिक्कत होने की वजह से मेडिकल कॉलेज आए हैं। इमरजेंसी में करीब दो घंटे हो गया लेकिन डॉक्टर नहीं आए हैं। मरीज को बहुत ही ज्यादा परेशानी हो रही है। राम गंज निवासी सीतापति को उल्टी और बुखार होने से तीमारदार इमरजेंसी में लेकर आए। इनको भी बेड नहीं मिल रहा है। स्ट्रेचर पर ही असहाय पड़ी रहीं।
परिजन साक्षी को धम्मौर से लेकर आए हैं। इनके पूरे बदन में दर्द है और तेज बुखार भी है। कई बार शिकायत के बाद इनका इलाज शुरू हो सका। डॉक्टर आए और इंजेक्शन देने के बाद चले गए। परिजनों ने कहा कि दो घंटे बीच चुके हैं, डॉक्टर नहीं मिले।
सीएससी डॉ़ एसके गोयल का कहना है कि कुछ ऐसे मरीज भी इमरजेेंसी में आते हैं जो कि एक्सीडेंट में घायल होते हैं, उन्हें ट्राॅमा सेंटर जाना चाहिए। ट्राॅमा सेंटर अब शुरू हो चुका है। इसमें 30 बेड है। कुछ ऐसे मरीज भर्ती हैं जिन्हें अब इलाज की जरूरत नहीं है। फिर भी भर्ती हैं। इस वजह से बेड कम पड़ जाते हैं। इस समय वायरल बुखार के मरीज कम हुए है। प्लेेटलेट्स की डिमांड भी कम हो गई है।