सुल्तानपुर। मेडिकल काॅलेज को एक अदद नेफ्रोलॉजिस्ट की तलाश है। ऐसे में गुर्दा रोग से पीड़ित मरीजों को जांच और इलाज कराने के लिए बाहर जाना पड़ता है। वहां डाॅक्टर की सलाह के बाद फिर मेडिकल काॅलेज में टेक्नीशियन मरीजों की डायलिसिस करते हैं।
स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय एवं चिकित्सालय में 13 बेड का डायलिसिस सेंटर संचालित है। यहां मरीजों की मुफ्त डायलिसिस की जाती है। डायलिसिस सेंटर की मैनेजर महकशां की मानें तो यहां रोजाना औसतन 30-32 मरीजों की डायलिसिस की जा रही है। टेक्नीशियन समेत 13 स्टाफ कार्यरत है, जो मरीज की डायलिसिस में मदद करते हैं। चार घंटे एक मरीज की डायलिसिस में लगते हैं। इस लिहाज से एक दिन में तीन शिफ्ट मेें कुल 39 मरीजों की डायलिसिस की क्षमता है।
हालांकि डायलिसिस के दौरान डॉक्टर न होने से कई बार दिक्कतें भी आती हैं, जिसके लिए मेडिकल काॅलेज में कार्यरत वरिष्ठ परामर्शदाता डाॅ. अनिल को नोडल बनाकर जिम्मेदारी दी गई है। दिक्कत यह है कि जब डायलिसिस की रिपोर्ट मरीजों को दी जाती है तो मरीज रिपोर्ट लेकर फिर से अपने नेफ्रोलॉजिस्ट के पास जाते हैं। रिपोर्ट देखने के बाद चिकित्सक जो सलाह देते हैं, उसके आधार पर दूसरी बार मरीज की डायलिसिस की जाती है। इधर-उधर भटकने के चलते मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
मेडिकल काॅलेज के प्राचार्य डाॅ. सलिल श्रीवास्तव ने बताया कि शासन से नेफ्रोलॉजिस्ट की तैनाती के लिए मांग की गई है। तलाश चल रही है। जल्द ही मेडिकल काॅलेज को नेफ्रोलॉजिस्ट मिल जाएगा।