दूबेपुर (सुल्तानपुर)। मेडिकल कॉलेज के ट्रॉमा सेंटर में मानक के अनुसार चिकित्सकों की तैनाती नहीं है। इमरजेंसी में सिर्फ दो ईएमओ (इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर) की तैनाती है। इसका सीधा असर अस्पताल के संचालन पर पड़ रहा है। ऐसे में यहां गंभीर रूप से घायल मरीजों को तत्काल अपेक्षित चिकित्सा नहीं मिल पाती है। कॉलेज प्रशासन के अधिकारी इस गंभीर समस्या की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं, मरीज परेशान हैं।
सड़क हादसों में घायल होने वाले लोगों को हायर मेडिकल सेंटरों जैसी चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की मंशा से अमहट में लखनऊ-वाराणसी हाईवे पर ट्रॉमा सेंटर की स्थापना की गई है। 30 बेड और 15 वेंटीलेटर की क्षमता वाले इस अस्पताल में मानक के अनुसार 24 घंटे आपातकालीन चिकित्सा सेवा के लिए चार ईएमओ की तैनाती होनी चाहिए ताकि आठ-आठ घंटे की शिफ्ट में चिकित्सकों की इमरजेंसी सेवा में ड्यूटी लगाई जा सके।
इसके साथ ही रात्रिकालीन शिफ्ट में 12 घंटे की ड्यूटी करने वाले डॉक्टर को अगले दिन रेस्ट दिया जा सके, मगर ऐसा नहीं है। ट्रॉमा सेंटर में मात्र दो आपातकालीन चिकित्सा अधिकारी डॉ. सूर्यकांत व डॉ. रामानुज की ही तैनाती है। रात में मेडिकल कॉलेज के दो जूनियर रेजिडेंट डाक्टरों के सहारे इमरजेंसी सेवा के संचालन की औपचारिकता पूरी की जा रही है। इस बारे में प्राचार्य डॉ. सलिल श्रीवास्तव का कहना है कि धीरे-धीरे व्यवस्थाएं बेहतर की जा रही हैं। जल्द ही यह समस्याएं दूर हो जाएंगी।