सुल्तानपुर। रोडवेज के कर्मचारी ही निगम को चूना लगाने में जुटे हैं। सुल्तानपुर डिपो में तैनात एक लिपिक ने एक महीने का शुल्क लेकर एक यात्री के लिए एक साल का मासिक सीजन टिकट (एमएसटी) बना दिया। गनीमत रही कि वाराणसी डिपो के परिचालक ने यह मामला पकड़ लिया। हालांकि तब तक यात्री 42 दिन अधिक यात्रा कर चुका था। ऐसे में अब अफसर जवाब तलब कर लिपिक को बचाने में जुटे हैं और यात्री से अतिरिक्त 5040 रुपये जमा करा लिए गए हैं।
अमेठी जिले के पूरे परवीना के निवासी दैनिक यात्री राजेश कुमार ने यह एमएसटी सुल्तानपुर डिपो से मुसाफिरखाना तक के लिए बनवाई थी। नियमानुसार एमएसटी एक माह के लिए ही बनाई जाती है। किंतु राजेश कुमार की जो एमएसटी बनी, उसमें 20 अप्रैल 2024 से 23 मई 2025 की वैधता अंकित कर दी गई थी। यानि उसे करीब 13 महीने यात्रा की सुविधा मिल गई। ऐसे में वह यात्रा करता रहा और किसी ने उस पर ध्यान भी नहीं दिया।
इस तरह उसने सुल्तानपुर से मुसाफिरखाना तक 42 दिन अधिक यात्रा कर डाली। एक दिन जब वह वाराणसी डिपो की एक बस में चढ़ गया तो परिचालक ने उसे पकड़ लिया। उसने कहा कि एक साल की एमएसटी भला कैसे बन सकती है? उसने इस बाबत अयोध्या मंडल में शिकायत कर दी।
इसके बाद जांच हुई तो सुल्तानपुर डिपो में तैनात एमएसटी लिपिक की गड़बड़ी सामने आई। सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक विनोद शुक्ला ने बताया कि इस मामले में लिपिक ने स्वीकार किया है कि गलती से 2024 की बजाय 2025 लिख गया था। यात्री को बुलाकर उससे अतिरिक्त यात्रा का टिकट मूल्य 5040 रुपये जमा करा लिया गया है। अग्रिम कार्यवाही के लिए लिपिक का स्पष्टीकरण उच्चाधिकारियों को भेज दिया गया है।
तबादला होने के बाद भी डटा है लिपिक
एमएसटी बनाने में गड़बड़ी जिस लिपिक के स्तर पर हुई है। उनका तबादला स्थानांतरण नीति के तहत जून में ही अयोध्या डिपो के लिए हो गया है। किंतु अभी तक उसे डिपो से कार्यमुक्त नहीं किया गया है।