सुल्तानपुर। केंद्र सरकार की ओर से लागू किए गए तीन नए कानूनों पर बार एसोसिएशन ने कड़ा विरोध जताया है। शुक्रवार को बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने वरिष्ठ वकीलों के साथ बैठक कर 11 सूत्री विरोध पत्र बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश को भेजने का निर्णय लिया। वकीलों ने तीनों कानूनों पर व्यापक विमर्श व संशोधन की जरूरत बताई है।
बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश ने एक जुलाई से पूरे देश मे लागू किए गए भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता व भारतीय साक्ष्य संहिता पर विरोध जताने के लिए जिला व तहसील अधिवक्ता संघ से आपत्ति व सुझाव मांगे हैं। इसी को लेकर शुक्रवार को दीवानी न्यायालय स्थित अधिवक्ता संघ भवन में बार एसोसिएशन की ओर से बैठक बुलाई गई, जिसमेें वकीलों ने तीन नए कानूनों की तमाम खामियां गिनाईं।
अधिवक्ता अरविंद सिंह राजा ने नए साक्ष्य अधिनियम में भाव भंगिमा की धारा (315) पर चर्चा करते हुए कहा कि यह न्यायाधीशों की ओर से तय हो सकता है। इसे वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये तय नहीं किया जा सकता है। वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेंद्र उपाध्याय ने कहा कि जो अभिलेख फाइल में हैं, उसे गवाहों को दिखाकर प्रदर्शन नहीं डाला जा सकता है। जीतेंद्र श्रीवास्तव ने नए साक्ष्य अधिनियम की कमियों का उजागर किया।
काशी प्रसाद शुक्ल ने कहा कि अभियुक्तों की न्यायिक अभिरक्षा 60 व 90 दिन करने से पुलिस की मनमानी बढ़ जाएगी। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अरविंद पांडेय ने बताया कि वकीलों की ओर से 11 सूत्री आपत्तियां व सुझाव तैयार किया गया है। इसे बार काउंसिल को भेजा जाएगा। बैठक में पूर्व अध्यक्ष रामविशाल तिवारी, शिवमंगल शुक्ल, नागेंद्र सिंह, नरेंद्र सिंह, रामफेर यादव, गिरिजा प्रसाद शुक्ल, सुधांशु श्रीवास्तव, सचिव आर्तमणि मिश्र आदि मौजूद रहे।