कादीपुर (सुल्तानपुर)। भारत केवल भूखंड मात्र नहीं बल्कि एक दर्शन, दृष्टि और विचार है। भारत शास्त्रार्थ और संवाद की भूमि है। प्राचीन भारत में अधिकार प्रधान नहीं कर्तव्य प्रधान समाज था। यदि हिंदुत्व जीवनशैली शिक्षा के साथ जुड़ जाए तो भारत विश्व में अग्रणी हो जाएगा। रविवार को संत तुलसीदास पीजी कॉलेज में हिंदुत्व और मानववाद विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में मुख्य अतिथि बीएचयू के पूर्व कुलपति प्रो़ गिरीश चंद्र त्रिपाठी ने ये विचार रखे।
मौलाना अबुल कलाम आजाद इंस्टीट्यूट ऑफ एशियन स्टडीज के सहयोग से हुई संगोष्ठी के अध्यक्ष चंद्रशेखर विश्वविद्यालय बलिया के कुलपति प्रो़ संजीत कुमार गुप्ता ने कहा कि हिंदुत्व मानवता की श्रेष्ठ औषधि है। विश्व कल्याण का रास्ता हिंदू संस्कृति से ही निकलता है। मानवता हिंदुत्व की पूंजी है। हनुमन्निवास सिद्धपीठ अयोध्या के महंत आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण ने कहा कि हिंदू होने का अर्थ है मानव होना। हिंदुत्ववाद ही मानववाद है।
विशिष्ट अतिथि एमएस विश्वविद्यालय बड़ौदा के प्रो़ कनुभाई निनामा ने कहा अपनी कमियों को दूर करते हुए कर्म करना ही श्रेष्ठ है। सोशल मीडिया के कारण आज ग्रंथ अध्ययन पर व्यापक प्रभाव पड़ा है। हमें इस पर विचार करना होगा।
गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्रो़ विनय कुमार सिंह ने कहा कि गोसेवा करते रहने से हिंदुत्व और मानवता, दोनों ही सही हो जाएगी। कार्यक्रम में प्रो़ जीतेंद्र तिवारी, प्राचार्य प्रो़ राम नयन सिंह, डॉ़ सतीश कुमार सिंह, सरदार इकबाल सिंह व सौरभ त्रिपाठी ने भी विचार व्यक्त किए।