सुल्तानपुर। हाॅर्टीकल्चर से देश की तस्वीर बदल सकती है। इसके लिए उन्नत किस्म के फलों व सब्जियों की बागवानी वैज्ञानिक तरीके से करने की जरूरत है। ये बातें सिंगापुर से पहुंचे वाई शी यिन गांगवो ने केएनआई फरीदीपुर परिसर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के दौरान कहीं।
केएनआई परिसर में रविवार को संगोष्ठी का दूसरा दिन रहा। संगोष्ठी को संबोधित करते हुए प्रो. शिवपूजन सिंह ने बायोटेक्नोलाजी की गुणवत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मिशन बना लेने पर असंभव कार्य संभव हो जाते हैं। बायोटेक्नोलाजी मानव कल्याण व पारिस्थितिकी तंत्र के समन्वय का एक सार्थक मिशन है।
उजबेकिस्तान के डॉ. दिलफूजा ने कहा कि कृषि में मृदा परीक्षण के आधार पर ही फसलों का निर्धारण किया जाना चाहिए। उसी के अनुसार उसे उपचार भी देने की जरूरत है। संगोष्ठी के निदेशक प्रो. आलोक कुमार सिंह ने बताया कि नेपाल, फ्रांस, यूएसए व सिंगापुर तथा देश के अनेक संस्थानों के कृषि व जैविक वैज्ञानिक तथा शोधार्थियों ने संगोष्ठी विषय के शोधपत्र का वाचन किया।
संगोष्ठी में फ्रांस से प्रो. रामेश्वर दूबे, नेपाल से संतोष मरहट्टा व माधव पी नियोपणे, जवरोवा व यूएसए से डॉ. रघु बी सिंह ने तकनीकी सत्र में अपने-अपने बहुमूल्य शोधपत्र प्रस्तुत किए। इसके साथ ही देश के जामिया कॉलेज साइंस और आर्ट अहमद नगर महाराष्ट्र के प्रो डॉ. वीडी तकाड़े की अध्यक्षता में वीपी पवार गोडगे वी मनोज, वेद प्रकाश बीएचयू वाराणसी ने भी शोध पत्र प्रस्तुत किए।
डॉ. वीडी तकाटे को द बेस्ट पेपर प्रजेंटर्स की उपाधि
संगोष्ठी में डॉ. हर्षवर्धन सिंह, प्रो. आरसी गुप्ता, प्रो. बीसी, देश के प्रमुख कृषि वैज्ञानिक डॉ एसके सिंह, प्रो. शिव प्रकाश सिंह, प्रो. आलोक कुमार सिंह, प्रो. सुशील कुमार सिंह, डॉ. अवधेश प्रताप सिंह, डॉ. एके जैन, डॉ. प्रीती माथुर आदि ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में जिले के कृषि वैज्ञानिक डॉ. सीके त्रिपाठी, कृषि संकाय के डॉ. एसएन त्रिपाठी, डॉ. एसके खान, डॉ. आरके वर्मा, डॉ. नवलदे भारती, डॉ. नीरज सिंह, डॉ. नवीन विक्रम सिंह तथा प्राध्यापक व विद्यार्थी मौजूद रहे। कार्यक्रम में शोध पत्र प्रस्तुतकर्ताओं को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। डॉ. वीडी तकाटे को द बेस्ट पेपर प्रजेंटर्स की उपाधि से नवाजा गया।