सुल्तानपुर। आचार संहिता उल्लंघन के मामले में एमपी-एमएलए के विशेष कोर्ट ने पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। फैसले के बाद शाम करीब पांच बजे पुलिस पूर्व मंत्री को लेकर लखनऊ के लिए रवाना हो गई।
आचार संहिता उल्लंघन के मामले में वर्ष 2012 में केस दर्ज किया गया था। 10 साल बाद यह फैसला आया तो गायत्री समर्थकों को थोड़ी राहत मिली। शुक्रवार दोपहर करीब तीन बजे पुलिस ने पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति को लखनऊ जेल से लाकर कोर्ट में पेश किया।
पौने चार बजे एमपी-एमएलए के विशेष कोर्ट के मजिस्ट्रेट योगेश कुमार यादव ने बचाव पक्ष के अधिवक्ता संतोष पांडेय और सरकारी वकील कालिका प्रसाद मिश्र व वैभव पांडेय की मौजूदगी में अपना फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि पूर्व मंत्री के खिलाफ लगाया गया आचार संहिता का उल्लंघन करने का मामला अभियोजन पक्ष साबित नहीं कर पाया है।
फैसले के बाद पूर्व मंत्री से इस संबंध में बात करने की कोशिश की गई लेकिन उन्होंने मीडिया के किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया। इस दौरान मौके पर पर्याप्त सुरक्षा का इंतजाम किया गया था। गायत्री प्रजापति के समर्थक भी मौजूद रहे।
कोर्ट केे फैसले के बाद कानूनी औपचारिकताओं के पूरा होने पर शाम करीब पांच बजे पुलिस गायत्री प्रजापति को लेकर लखनऊ के लिए रवाना हो गई। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे सरकारी वकील कालिका प्रसाद मिश्र ने कहा कि वे कोर्ट के फैसले से संतुष्ट नहीं हैं। निर्णय का अध्ययन करने के बाद अपीलीय कोर्ट में राज्य सरकार की ओर से अपील दायर की जाएगी।
अमेठी विधानसभा सीट से सपा के प्रत्याशी रहे गायत्री प्रजापति 28 जनवरी 2012 को नामांकन पत्र दाखिल करने गए थे। पुलिस का आरोप है कि गायत्री प्रजापति ने बिना अनुमति के जुलूस निकालकर आचार संहिता का उल्लंघन किया था। उनके खिलाफ अमेठी के तत्कालीन कोतवाल अमरेंद्रनाथ बाजपेेयी ने आचार संहिता का उल्लंघन करने का मुकदमा दर्ज कराया था।
पूर्व मंत्री के अधिवक्ता संतोष पांडेय ने कहा कि कोर्ट का फैसला सही है। अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर उचित फैसला सुनाया है। उन्होंने बताया कि एसडीएम अमेठी से अनुमति लेने के बाद निर्धारित मार्ग से ही गायत्री प्रजापति नामांकन करने गए थे। उन पर सत्तापक्ष के दबाव में फर्जी केस दर्ज किया गया था। अदालत से न्याय की जीत हुई है।