सुल्तानपुर। पूर्व सांसद के सुरक्षा गार्ड की वर्ष 1982 में गौरीगंज गेस्ट हाउस में राइफल से चली गोली से हुई मौत के मामले में बुधवार को स्पेशल मजिस्ट्रेट एमपी-एमएलए योगेश कुमार यादव ने पूर्व सांसद अकबर अहमद डंपी व पूर्व आईएएस जेएन मिश्रा को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है। कोर्ट के फैसले से दोनों को राहत मिल गई है।
विशेष लोक अभियोजक कालिका प्रसाद मिश्र के मुताबिक अमेठी जिले के गौरीगंज के लोक निर्माण विभाग के गेस्ट हाउस में 19 सितंबर 1982 को संजय विचार मंच की राष्ट्रीय अध्यक्ष व मौजूदा समय में जिले की सांसद मेनका गांधी की मौजूदगी में बैठक चल रही थी। उसी दौरान अचानक राइफल से गोली चलने की आवाज आई। लोगों ने कमरे के अंदर जाकर देखा तो बस्ती जिले के नरहरिया निवासी टिकोरी सिंह गोली लगने से गंभीर रूप से घायल मिले थे। घायल टिकोरी सिंह को इलाज के लिए लखनऊ के एक अस्पताल में ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई थी। मृतक टिकोरी सिंह बस्ती के तत्कालीन सांसद रहे कल्पनाथ सोनकर के सुरक्षा गार्ड थे। पुलिस ने दरोगा राम कुमार त्रिपाठी की तहरीर पर लापरवाही से चली गोली से मौत होने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया था।
मामले की विवेचना कर रही सीबीसीआईडी ने पूर्व सांसद अकबर अहमद डंपी व पूर्व आईएएस जेएन मिश्र के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की थी। पुलिस तीसरे आरोपी हरियाणा के करनैल सिंह का पता नहीं लगा पाई थी। कोर्ट ने पूर्व सांसद अकबर अहमद डंपी व पूर्व आईएएस जेएन मिश्र के खिलाफ लापरवाही से मौत करने, सबूत मिटाने, साजिश रचने समेत कई धाराओं में आरोप तय (चार्ज) किया था। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से आठ गवाह कोर्ट में पेश किए गए थे। बचाव पक्ष के अधिवक्ता अयूब उल्ला खां ने बताया कि बुधवार को स्पेशल मजिस्ट्रेट एमपी-एमएलए योगेश कुमार यादव ने पूर्व सांसद अकबर अहमद डंपी व पूर्व आईएएस जेएन मिश्र को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है।