लंभुआ (सुल्तानपुर)। जल्द ही फुल डेप्थ रेक्लेमेशन (एफडीआर) तकनीक से बन रही पहली सड़क पर वाहन फर्राटा भर सकेंगे। लंभुआ तहसील के बेदूपुरा से सनईरामपुर तक सात किलोमीटर लंबी बनने वाली यह सड़क नवंबर तक पूरी हो जाने के आसार हैं। आईआईटी रुड़की से ट्रायल पैच का सैंपल पास हो जाने के बाद इसका तेजी से निर्माण हो रहा है।
प्रदेश सरकार पुरानी ग्रामीण सड़कों के पुनर्निर्माण के लिए इस तकनीक का प्रयोग कर रही है। इसमें सड़क की आयु भी अधिक होती है और यह पर्यावरण के अनुकूल भी है। इस योजना के तहत जिले में कुल 15 सड़कों का निर्माण किया जाना है। इनमें सभी का सौ मीटर तक ट्रायल पैच बनवाया गया और उसका सैंपल जांच के लिए आईआईटी रुड़की भेजा गया था। सैंपल पास होने के बाद इस सड़क का निर्माण शुरू कर दिया गया है। इसके निर्माण में विदेश से आई मशीनों को लगाया गया है जिसे देखने के लिए आसपास के ग्रामीण भी पहुंच रहे हैं।
इस तकनीक में सड़क में पुरानी गिट्टी को ही खोदकर उसमें केमिकल व सीमेंट मिलाकर सड़क बनाई जा रही है। यह सड़क बनने से बेदूपारा, बरेहता, अर्जुनपुर, खुदौली, शंकरपुर, बसावनपुर, रानीपुर, सनईरामपुर आदि गांवों के लगभग 50 हजार ग्रामीण लाभ उठाएंगे। ग्रामीण अभियंत्रण सेवा के अवर अभियंता मनीष पांडेय ने बताया कि पांच करोड़ की लागत वाली यह सड़क सितंबर में बनना शुरू हुई है जो नवंबर अंत तक पूरी हो जाएगी। रोज 500 मीटर सड़क बन रही है। (संवाद)
क्या है एफडीआर तकनीक
एफडीआर तकनीक से पुरानी रोड का उच्चीकरण किया जाता है। इसमें पुरानी रोड की गिट्टी समेत अन्य चीजों का ही इस्तेमाल किया जाता है। सड़क को जापान और नीदरलैंड की मशीन से सीमेंट और एडिटिव (ऐसा रसायन जो सीमेंट और मिट्टी को जोड़ देता है) को मिक्स करके बनाया जाता है। जेई मनीष पांडेय कहते हैं कि इसके बाद एक लेयर जियो फ्रैब्रिक की बिछाई जाती है। ऐसे में नीचे सीमेंटेड रोड पर जो क्रैक आते हैं, उसका असर ऊपर नहीं दिखता है। इस सड़क की लाइफ करीब दस साल होती है।