सुल्तानपुर। जिले में डीएपी के अभाव 35 फीसदी गेहूं की बुआई अटकी हुई है। खेतों में नमी खत्म होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। साधन सहकारी समितियों व सहकारी संघ से डीएपी नहीं मिल पाने से किसान गेहूं की बुआई नहीं करा पा रहे हैं। बुआई में हो रही देरी से उत्पादन प्रभावित होने के आसार बढ़ गए हैं।
इस बार जिले में एक लाख पांच हजार हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की बुआई कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस समय मध्य गेहूं की बुआई कराने का समय चल रहा है। किसानों को बुआई कराने के लिए डीएपी नहीं मिल पा रही है। किसान डीएपी के लिए दर-दर भटक रहे हैं। डीएपी के अभाव में ज्यादातर साधन सहकारी समितियों व सहकारी संघ पर ताला लटक रहा है। डीएपी के अभाव में किसान गेहूं की बुआई नहीं करा पा रहे हैं। खेतों से नमी खत्म हो जा रही है। अभी तक निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष बमुश्किल 65 फीसदी गेहूं की बुआई हो पाई है। अभी भी 35 फीसदी गेहूं की बुआई किसान नहीं करा पाए हैं।
इन उर्वरकों का कर सकते हैं इस्तेमाल
कमला नेहरू कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि प्रसार अधिकारी डॉ. सीके त्रिपाठी ने बताया कि डीएपी उपलब्ध नहीं होने पर इसके विकल्प के तौर पर किसान सिंगल सुपर फॉस्फेट, यूरिया व पोटाश मिलाकर गेहूं की बुआई करा सकते हैं। डीएपी में सिर्फ दो प्रमुख तत्व फॉस्फोरस 46 फीसदी व नाइट्रोजन (यूरिया) 18 फीसदी होता है। वहीं, सिंगल सुपर फॉस्फेट में तीन प्रमुख तत्व फॉस्फोरस 16 फीसदी, कैल्शियम 21 फीसदी व सल्फर 12 फीसदी शामिल होता है। सिंगल सुपर फॉस्फेट जल के साथ अत्यधिक घुलनशील होता है जो आसानी से पौधों के लिए प्राप्त हो जाता है। इसके साथ ही अम्लीय मृदा में अगर सिंगल सुपर फॉस्फेट डालते हैं तो कैल्शियम की मात्रा इसके अंदर होने के कारण यह मृदा की अम्लीयता को कम देता है। बताया कि 15 अक्तूबर से 15 नवंबर तक अगेती गेहूं की बुआई की जाती है। 15 नवंबर से 15 दिसंबर तक गेहूं की मध्य बुआई का समय होता है। इसके बाद पिछेती गेहूं की बुआई किसान करते हैं।