जड़ी-बूटियाें का खजाना है ब्रह्मचारिणी आश्रम
किसान भी उगाएं तो बदल सकती है उनकी किस्मत
धनपतगंज (सुल्तानपुर)। चंदौर स्थित ब्रह्मचारिणी आश्रम जड़ी-बूटियों का खजाना है। इसके बावजूद इलाके के किसान इन्हें उगाने के तरीकों से अनजान हैं। किसानों को आश्रम में शिविर लगाकर प्रशिक्षित किया जाए तो यहां की तस्वीर बदल सकती है। किसानों अपने खेतों में जड़ी-बूटी उगाकर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।
आश्रम के परिसर में ब्राह्मी, पाढ़ी, पुनर्नवा साफेद, कटेरी सफ़ेद, गोरखमुंडी, पान, शंखपुष्पी, बर्जदंती, नागरमोथा समेत कई जड़ी बूटियों के पौधे फैले हैं। क्षेत्र के चंदौर से होकर गुजरने वाली पुरानी गोमती नदी को ब्रह्मचारिणी के नाम से भी जाना जाता है। यहां के तटवर्ती भू-भाग पर फैले आश्रम में वनौषधियां काफी मात्रा में हैं। इनमें ब्राह्मी, पाढ़ी, पुनर्नवा साफेद, कटेरी सफेद, गोरखमुंडी, पान, शंखपुष्पी, बज्रदंती, नागरमोथा आदि बहुत सी जड़ी-बूटियां हैं। आश्रम के पीठ पुरुष ब्रह्मचारी महाराज यहां अपने शिष्यों को योग की शिक्षा दिया करते थे। आसपास के ग्रामीणों का उपचार इन्हीं जड़ी-बूटियों से करते थे। इस परंपरा को उनके शिष्य पं. रामलगन लंबे समय तक जीवंत किए रहे। उनके देहावसान के बाद यह परंपरा मंद पड़ गई। हालांकि, जड़ी-बूटियों के संरक्षण और संवर्धन का प्रयास जारी है
बॉक्स
प्रशिक्षण देने की आवश्यकता
आश्रम सूर्य उपासना, योग व जड़ी-बूटियों से उपचार का बड़ा केंद्र रहा है। व्यावसायिक दृष्टि से किसानों को प्रशिक्षण देने की आवश्यकता है जिससे व जड़ी-बूटियां उगाकर अतिरिक्त कमाई कर सकें।
- बाबा अवधेश महाराज, ब्रह्मचारिणी आश्रम।