सुल्तानपुर। सिविल लाइंस में जिला पंचायत को करोड़ों रुपये बाजार मूल्य की नजूल भूमि कार्यालय उपयोग के लिए पट्टे पर मिली है लेकिन वहां कांप्लेक्स बनवाया जा रहा है। यही नहीं विनियमित क्षेत्र के नियत प्राधिकारी ने भी बिना सोचे-समझे इसका नक्शा पास कर डाला। अब इसकी शिकायत शासन तक पहुंच गई है, यह मामला हाईकोर्ट के सामने भी उठाने की तैयारी हो रही है।
ब्रिटिश काल में 30 मार्च 1943 में को छावनी सदर परगना मीरानपुर में गाटा संख्या 421 में आठ बीघा, नौ बिस्वा और छह धुर नजूल की भूमि का पट्टा डिस्ट्रिक्ट बोर्ड को दिया गया था। 90 वर्ष के लिए मिले इस पट्टे की अवधि 29 मार्च 2033 को पूरी होने वाली है।
मौजूदा सिविल लाइंस में इसी भूखंड के बड़े हिस्से पर जिला पंचायत का कार्यालय बना हुआ है। इसके बगल में इस भूखंड का एक बड़ा हिस्सा खाली पड़ा हुआ था जिस पर कांप्लेक्स बनाने के लिए जिला पंचायत ने पांच दिसंबर 2020 को विज्ञापन जारी किया था।
जिला पंचायत ने कांप्लेक्स की दुकानों का आवंटन भी कर दिया और लाखों रुपये आवंटियों से जमा भी करवा लिए लेकिन इसके खिलाफ हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में एक याचिका दायर हो गई। इस वजह से निर्माण कार्य रोकना पड़ा और जब 23 जनवरी 2021 को जिला पंचायत अध्यक्ष के अधिवक्ता ने निर्माण कार्य का टेंडर निरस्त करने का पत्र हाईकोर्ट में दाखिल किया तो यह याचिका निस्तारित कर दी गई थी।
तब से यह मामला ठंडे बस्ते में पड़ा रहा। इसके बाद हाल ही में जिला पंचायत के अधिकारियों ने टेक्निकल सेशन लेकर इस कांप्लेक्स का निर्माण दोबारा शुरू करवा दिया है। अभी भूतल पर ही कॉलम आदि के निर्माण किए जा रहे हैं।
एक बार फिर यह निर्माण फंसता हुआ दिख रहा है क्योंकि सिविल लाइंस में गोलाघाट निवासी राघवेंद्र पांडेय ने प्रमुख सचिव पंचायती राज को मंगलवार को पत्र भेजकर इस निर्माण को अवैध करार देते हुए रुकवाने की मांग की है। इसकी प्रतिलिपि मंडलायुक्त, जिलाधिकारी और अपर मुख्य अधिकारी को भी भेजी गई है। आरोप है कि नजूल की जमीन पर यह निर्माण शासनादेश के विपरीत है और इसका नक्शा भी नियमत: पास नहीं किया जा सकता है।
नजूल की भूमि पर कैसे पास हुआ कांप्लेक्स का नक्शा
24 सितंबर 2020 को प्रभारी अधिकारी नजूल ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि यह जमीन कार्यालय उपयोग के लिए जिला पंचायत को पट्टे पर मिली है। पट्टे की मियाद 29 मार्च 2033 तक है, यह जमीन फ्री होल्ड भी नहीं है। जाहिर है कि नजूल की जमीन पर व्यावसायिक उपयोग के लिए विनियमित क्षेत्र नक्शा नहीं पास कर सकता था। इस रिपोर्ट को नजरअंदाज करते हुए 20 नवंबर 2020 को विनियिमत क्षेत्र के नियत प्राधिकारी ने कांप्लेक्स का नक्शा स्वीकृत कर दिया।
शासनादेश के खिलाफ है निर्माण
27 दिसंबर 1997 को जारी शासनादेश के अनुसार जिला पंचायत लीज पर ली गई नजूल की जमीन या शुद्ध रूप से नजूल की जमीन पर दुकान या कांप्लेक्स का निर्माण नहीं करवा सकती। ऐसे में जिला पंचायत के अधिकारी यह निर्माण कैसे करवा रहे हैं, यह बड़ा सवाल है।
अध्यक्ष बोलीं- एएमए से पूछें
नजूल की जमीन पर यह व्यावसायिक निर्माण कैसे कराया जा रहा है, इस बारे में पूछने पर जिला पंचायत अध्यक्ष ऊषा सिंह ने कहा कि वे इस समय लखनऊ में हैं। यह बात अपर मुख्य अधिकारी से पूछिए।
इस बारे में कार्यालय आकर बात करें : एएमए
नजूल की जमीन पर व्यावसायिक निर्माण के सवाल पर अपर मुख्य अधिकारी हरिओम नारायण चंद्रा कहते हैं कि इस बारे में अध्यक्ष से बात करें। जब उनसे कहा गया कि अध्यक्ष ने ही एएमए से बात करने का सुझाव दिया है तो उन्होंने कहा कि इस बारे में कार्यालय में ही बात हो सकती है।