सुल्तानपुर। 50 लाख रुपये से अधिक की पांच परियोजनाओं को लटकाकर कार्यदायी संस्थाओं ने करोड़ों के राजस्व का चूना लगा दिया है। दशक भर से अधिक समय से लटकीं अस्पताल समेत अन्य परियोजनाओं का फायदा अभी तक लोगों को नहीं मिल सका है। लेटलतीफी से कई परियोजनाएं भूमि विवाद में अटक गई हैं। इनमें शहर की करोड़ों रुपये की नगर पेयजल पुनर्गठन योजना समेत कुछ अन्य परियोजनाएं भी शामिल हैं।
जिले में मौजूदा समय में विभिन्न विभागों की 139 परियोजनाओं का काम करीब 850 करोड़ रुपये से कराया जा रहा है। विभिन्न निर्माण कार्यों के लिए अभी तक 588 करोड़ रुपये कार्यदायी संस्थाओं को अवमुक्त किए जाने का दावा किया जा रहा है। इसमें अकेले जलनिगम की नमामि गंगे व ग्रामीण पेयजल आपूर्ति की 49 परियोजनाएं शामिल हैं।
इनके काम करीब 200 करोड़ रुपये से कराए जा रहे हैं। पैक्सफेड की ओर से 1.74 करोड़ रुपये से वर्ष 2010 से कराए जा रहे जयसिंहपुर तहसील के आवासीय भवन के निर्माण कार्य में पहले कार्यदायी संस्था ने हीलाहवाली बरती। इसके बाद आवासीय भवन के भूमि विवाद का मामला कोर्ट पहुंच गया। इस विवाद के चलते लागत बढ़कर करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये पहुंच गई।
इसी तरह राजकीय निर्माण निगम की ओर से पीएचसी बढ़ौनाडीह, विंदेश्वरीगंज व चंदौर का काम वर्ष 2013 में मंजूर हुआ था। इन तीनों से संबंधित मामले कोर्ट में पहुंच जाने से 10 साल बाद भी निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका।
इसमें महंगाई का हवाला देकर कार्यदायी संस्था ने पूर्व में 91 लाख रुपये की दर से स्वीकृत चंदौर व विंदेश्वरीगंज पीएचसी भवन की लागत बढ़वाकर करीब दोगुना कर ली। इसके बाद भी काम लटका है। हालांकि इसके अलावा अन्य 18 काम समयावधि के भीतर कराए जाने का दावा विभागों की ओर से किया जा रहा है।
शहर में नौ साल से लटका 37 करोड़ का पेयजल योजना का काम
शहर में नगर पुनर्गठन पेयजल योजना के तहत 37 करोड़ की लागत से वर्ष 2014 में काम स्वीकृत हुआ था। कार्यदायी संस्था की हीलाहवाली से काम पूर्ण होने की समयावधि बीत गई लेकिन अभी तक काम पूरा नहीं हो सका। कार्यदायी संस्था का मामला कई बार बैठकों में उठ चुका है। पिछली बैठक में सांसद मेनका गांधी, नपा अध्यक्ष प्रवीन अग्रवाल ने नाराजगी जताई थी। इसके बाद भी अभी तक काम पूरा नहीं हो सका।
200 करोड़ रुपये की ग्रामीण जलापूर्ति योजना का काम अधर में
जिले में नमामि गंगे व ग्रामीण जलापूर्ति योजना के तहत घर-घर पानी पहुंचाने के लिए जलनिगम ग्रामीण की ओर से 49 परियोजनाओं का काम करीब 200 करोड़ रुपये से कराया जा रहा है। अगस्त 2022 से शुरू परियोजनाओं का अधिकांश काम वर्ष 2023 में पूरा कराया जाना है। इसके बाद भी अधिकांश परियोजनाओं का काम लंबित है। परियोजनाएं समय से पूरा होने के आसार क्षीण होते जा रहे हैं। लापरवाही पर डीएम व सीडीओ की ओर से भी शासन को पत्र लिखा जा चुका है लेकिन मामले में कार्यदायी संस्थाओं पर कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
समय से काम पूरा न करने वालों पर होगी कार्रवाई
ने कहा कि विकास कार्यों की प्रतिमाह समीक्षा करके कार्यों को समय से पूरा कराने का निर्देश दिया जा रहा है। समय से काम पूरा न करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को पत्र लिखा जाएगा। कुछ कार्य भूमि विवाद की वजह से लंबित चल रहे हैं।
-जसजीत कौर, जिलाधिकारी