सुल्तानपुर में कुछ यूं भट्ठी जलाकर बनाई जाती है कच्ची शराब। (फाइल फोटो)
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सुल्तानपुर जिले में जहरीली शराब पीने से चार वर्ष पूर्व दो अलग-अलग जगहों पर पांच लोगों की मौत हुई थी। बारात में चार लोगों की मौत होने पर आबकारी विभाग ने पड़ोसी जिले अंबेडकरनगर का मामला बताकर अपना पल्ला झाड़ लिया था। वहीं, अमेठी में भी एक साथ पांच लोगों की जान जहरीली शराब ने ली थी। विगत दिवस आजमगढ़ में हुई 17 लोगों की मौत इसका प्रमाण है।
जिला काफी दिनों से अवैध शराब की मंडी बना हुआ है। गैर प्रांत की बनी हुई शराब तस्करी करके जिले में लाई ला रही है। गोमती नदी के तराई इलाके में नियमित अवैध शराब की भट्ठियां धधकती रहती हैं। प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सत्ता संभालने के बाद अवैध शराब के खिलाफ आबकारी विभाग व पुलिस ने छापेमारी अभियान चलाया था।
कुछ दिनों तक छापेमारी होने के बाद आबकारी विभाग व पुलिस का अभियान ठंडा पड़ गया है। प्रदेश में कहीं जहरीली शराब से लोगों की मौत होने के बाद आबकारी विभाग व पुलिस के साथ प्रशासन कुछ दिनों तक सख्ती दिखाता है, लेकिन यह ज्यादा दिन तक कायम नहीं रह पाती है। अवैध शराब को लेकर नेतागण भी बहुत मुखर नहीं होते। घटना होने के बाद ही आवाज उठती है।
कराई जा रही छापेमारी : आबकारी इंस्पेक्टर सुरेशचंद्र मिश्र ने बताया कि जिले में जहरीली शराब पीने से किसी की मौत नहीं हुई है। मोतिगरपुर में जिस बारात में जहरीली शराब पीने से चार बरातियों की मौत हुई थी, वे अंबेडकरनगर जिले से जहरीली शराब पीकर आए थे। अवैध शराब पर रोकथाम लगाने के लिए नियमित छापेमारी की जाती है। छापेमारी में अवैध शराब के अड्डों को नष्ट कराकर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।