जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में सोमवार की शाम फार्मासिस्ट की पिटाई मामले ने मंगलवार को तूल पकड़ लिया। आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर चिकित्सकों, फार्मासिस्टों समेत सभी स्वास्थ्य कर्मियों ने ओपीडी का बहिष्कार कर दिया।
स्वास्थ्य कर्मियों के कार्य बहिष्कार से जिला अस्पताल पहुंचे मरीजों व तीमारदारों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। सीओ के समझाने-बुझाने व इमरजेंसी कक्ष के सामने सुरक्षा कर्मियों की ड्यूटी लगाने के आश्वासन के बाद स्वास्थ्य कर्मी करीब चार घंटे बाद काम पर लौटे।
सोमवार की शाम सर्पदंश से हुई बच्चे की मौत के बाद आक्रोशित परिवारीजनों ने जिला अस्पताल के इजमरेंसी कक्ष में फार्मासिस्ट संतोष बरनवाल की पिटाई कर दी थी। परिवारीजनों का आरोप था कि बच्चे की मौत चिकित्सक की लापरवाही से हुई है।
मंगलवार को फार्मासिस्ट की पिटाई मामले ने तूल पकड़ लिया। जिला अस्पताल के चिकित्सकों व अन्य स्वास्थ्य कर्मियों ने ओपीडी का बहिष्कार कर दिया। नाराज चिकित्सक ओपीडी से निकलकर धरने पर बैठ गए। सुबह आठ बजे से 12.30 बजे तक ओपीडी सेवा करीब चार घंटे तक ठप रही। प्रदर्शनकारी जिला अस्पताल परिसर में सुरक्षा मुहैया कराने की मांग कर रहे थे। सूचना पर सीओ नगर मुकेश मिश्रा मौके पर पहुंचे। उनके आश्वासन के बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ।
चार घंटे तक ओपीडी में चिकित्सकों के न बैठने से गर्मी में दूर-दराज से आए मरीज व तीमारदारों को इलाज के लिए काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। मरीज व तीमारदार इलाज के लिए इधर-उधर भटकते रहे। दवा वितरण कक्ष में भी कामकाज ठप रहा। इस वजह से मरीजों को दवा भी नहीं मिल सकी। इस बीच इमरजेंसी सेवाएं बहाल रहीं लेकिन वहां काम का दबाव रहा।