शहर हो या देहात। गली-कूचों से लेकर भीड़-भाड़ वाले स्थानों तक पर न केवल छोटे सिलेंडर अवैध रूप से बिक रहे हैं बल्कि उनकी खुलेआम रीफिलिंग भी हो रही है। सहालग में इस धंधे ने और जोर पकड़ लिया है। कम कीमत के ये सिलेंडर कितने घातक हैं, इसका अंदाजा शायद उपयोग करने वालों को भी नहीं है। बाराबंकी में हुए दर्दनाक हादसे के बाद भी पूर्ति विभाग की ओर से इस पर प्रतिबंध को लेकर कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है।
बाराबंकी जनपद में हुए छोटे सिलेंडर के विस्फोट से हुए हादसे के बाद भी जिले का प्रशासनिक अमला इसकी खरीद-बिक्री की मॉनिटरिंग को लेकर फिक्रमंद नहीं है। अवैध कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा रही है। लोग कम कीमत व कनेक्शन की दौड़-भाग से बचने के लिए छोटे सिलेंडरों को अधिकृत एजेंसी के बजाय दुकानों से खरीद रहे हैं। इसका उपयोग कितना घातक हो सकता है, उसका इल्म भी उन्हें नहीं है। सरकार ने बड़े सिलेंडरों के साथ सीमित गैस का उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं के लिए छोटे गैस की सिलेंडरों की व्यवस्था की है।
जनपद में विभिन्न कंपनियों की 26 से अधिक गैस एजेंसियां संचालित हो रही हैं। छोटे सिलेंडर में पांच लीटर गैस की क्षमता होती है। नियमत: ये गैस सिलेंडर सिर्फ अधिकृत एजेंसी के जरिए ही बेचे जाने चाहिए। फिर भी मानक के विपरीत शहर के कई स्थानों पर दुकानों में छोटे गैस सिलेंडर धड़ल्ले से बेचे जा रहे हैं।