जिला अस्पताल की मॉर्च्युरी के आसपास कुत्तों का जमावड़ा रहता है। पूर्व में एक महिला के शव की आंख चूहे खा गए थे, समाजसेवियों के बवाल करने के बाद अस्पताल प्रशासन ने यहां चौकीदार की तैनाती की है, बावजूद इसके स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ। अमर उजाला ने मंगलवार को मॉर्च्युरी का मुआयना किया तो वहां कुत्ते बैठे मिले। जिले के अस्पतालों में भी कुत्तों और मवेशियों का प्रवेश रोकने के कोई इंतजाम नहीं हैं।
मॉर्च्युरी में तीन वर्ष पूर्व एक लावारिस महिला का शव रखा गया था। तीसरे दिन जब कोतवाली पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम कराने के लिए बाहर निकाला तो उसकी आंख गायब थी। इसकी जानकारी जब शहर के कुछ समाजसेवियों को हुई तो जिला अस्पताल में जमकर हंगामा काटा था। उसके बाद कुछ दिनों तक मॉर्च्युरी के पास चौकीदार की ड्यूटी लगाई जाती रही, लेकिन समय बीतने के साथ फिर सब पहले जैसा हो गया।
करीब डेढ़ वर्ष पूर्व जिला अस्पताल परिसर में ऑपरेशन के दौरान एक मरीज का चिकित्सक ने हाथ का पंजा काटकर अलग कर दिया था, जिसे परिसर में ही फेंक दिया गया था। दूसरे दिन तीन-चार कुत्ते हाथ के पंजे को खा रहे थे। तत्कालीन डीएम की फटकार के बाद अस्पताल परिसर से कुत्तों के साथ ही मवेशियों को हटाया गया था। मंगलवार की सुबह मॉर्च्युरी के बाहर एक कुत्ता, जबकि तीन-चार मवेशी बैठे मिले। मॉर्च्युरी के पास ही सेप्टिक वार्ड है, जहां इतनी ज्यादा गंदगी है कि कोई भी मरीज रह नहीं सकता।