जिले के पुलिस महकमे में आवासीय भत्ते में भारी अनियमितता प्रकाश में आई है। तमाम निरीक्षक व उप निरीक्षकों ने थाने में तैनाती के दौरान सरकारी आवास में रहने के बावजूद आवासीय भत्ता लिया है।
यह जानकारी आरटीआई के तहत विभाग ने खुद मुहैया कराई जबकि एसपी को मिलने वाले आवासीय भत्ते की जानकारी महकमा नहीं दे सका। मामला राज्य सूचना आयोग में पहुंचने पर आयोग ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए पुलिस अधीक्षक को बुधवार को तलब किया है।
जिले में पांच कोतवाली और 12 थाने हैं। इसमें महिला थाना भी शामिल है। 2013-14 में कोतवाली व थाने में इंस्पेक्टर व एसआई की बतौर कोतवाल व थानाध्यक्ष के रूप में तैनाती की गई थी। तैनाती के दौरान थाना प्रभारी थाना परिसर में बने आवास में रहते हैं। इसके बावजूद तैनाती के दौरान थाना प्रभारियों ने आवासीय भत्ता लेने से परहेज नहीं किया। वहीं जिला मुख्यालय पर स्थित पुलिस अधीक्षक आवास किराए पर लिया गया है।
मकान मालिक को जिले के पुलिस विभाग की ओर से एसपी आवास का किराया 420 रुपये ही दिया जा रहा है। हालांकि विभाग ने इसकी जानकारी नहीं दी। एसपी को पुलिस मुख्यालय से कितना आवासीय भत्ता दिया जा रहा है। ये बताने में पुलिस विभाग के अधिकारियों को पसीने छूट रहे हैं।
आरटीआई एक्टिविस्ट रामानंद मिश्र ने सरकारी आवास भत्ता की निर्धारित समयावधि में जानकारी नहीं मिलने पर राज्य सूचना आयोग का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने आयोग के समक्ष अपील दायर कर पुलिस विभाग के अधिकारियों को मिलने वाले आवासीय भत्ते के बारे में विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की है। 27 नवंबर 2015 को आयोग ने बीते छह जनवरी के लिए एसपी से जवाब मांगा था। आवेदक को सूचना नहीं मिलने पर राज्य सूचना आयोग ने पुलिस अधीक्षक को बुधवार को तलब किया है।